कुशीनगर के थाना नेबुआ नौरंगिया परिसर में स्थित “संस्कृत उच्चतर माध्यमिक विद्यालय” पिपरा बाजार में बना रहा रील, जिम्मे कौन?
धनंजय कुमार पाण्डेय, ब्यूरो चीफ, उत्तर प्रदेश
✓ हिंदुस्तान में “भारतीय संस्कृति” और “संस्कृत भाषा” का कहीं न कहीं गहरे संबंधों के सार्थकता को दर्शाता है।
✓ कुशीनगर जनपद के नेबुआ नौरंगिया थाना परिसर में स्थित संस्कृत उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में रिल बनाने वाले का जिम्मेदार कौन?
✓ जिले में सैकड़ों की संख्या में संचालित हो रहे संस्कृत उच्चतर माध्यमिक विद्यालय और महा- विद्यालयों की कब बदलेगी दशा और दिशा?
✓ संस्कृत विद्यालय के संचालन पर प्रदेश सरकार दे विशेष ध्यान, कई विद्यालयों में लटक रहे ताले।
✓ जानें उत्तर प्रदेश में शैक्षिक व्यवस्थाओं को लेकर प्रदेश सरकार द्वारा किस तरह की चल रही मुहिम?
आपको बतादें, प्रदेश सरकार एक तरफ जहां प्राइमरी विद्यालयों में दिन प्रतिदिन घटती हुई छात्र संख्याओं को लेकर राज्य के कई सारे प्राइमरी स्कूलों को बंद किया जा रहा है! वहीं कई वर्षों से प्रदेश में संचालित हो रहे संस्कृत उच्चतर माध्यमिक विद्यालय एवं महा विद्यालयों में बिना छात्र संख्याओं के ही हजारों की संख्या में कार्यरत पूरे प्रदेश में संस्कृत विद्यालय के अध्यापकों को प्रदेश सरकार द्वारा वेतन का भुगतान किया जा रहा है! जिसका सीधा असर आम जनता को महंगाई के रूप में झेलना पड़ रहा है।
कुशीनगर :- वैसे तो कुशीनगर को मुख्यमंत्री का पड़ोसी जिला कहा जाता है, लेकिन अगर बात भ्रष्टाचार की हो तो शायद इस जिले का स्थान “पहला” होगा।
पूरा मामला जिले के थाना नेबुआ नौरंगिया परिसर में स्थित संस्कृत उच्चतर माध्यमिक विद्यालय पिपरा बाजार की है, जहां विद्यालय के प्रांगण में एक व्यक्ति रिल बनाते नजर आ रहा है, जनपद का ये एक मात्र ऐसा विद्यालय है जहां एक ही परिसर में थाना, संस्कृत उच्चतर माध्यमिक विद्यालय और मन्दिर तीनों ही स्थित है। यहां पूरे दिन थाने के कर्मचारी, मंदिर के पुजारी और विद्यालय में कार्यरत दो अध्यापक विकास पाण्डेय एवं सौम्या तिवारी भी संभवतः मौजूद रहते होंगे। इतने लोगों के रहते हुए दिन के उजाले में विद्यालय परिसर में एक व्यक्ति का आना और रिल बनाना हर व्यक्ति को अजीब लगेगा।
✓ नेबुआ नौरंगिया थाना परिसर में स्थित “संस्कृत उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के बारे में क्या कहते हैं सूत्र?
आपको बतादें, सूत्रों का कहना है कि, पिपरा बाजार में स्थित संस्कृत उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के ताले अक्सर लटकते रहते हैं! कक्षाएं तो चलते हुए वर्षों बीत गए किसी ने देखा ही नहीं होगा।
अब ऐसे में बड़ा सवाल ये है कि, जिस कार्य के लिए विद्यालय में दो शिक्षकों की तैनाती हुई है! जिन्हें सरकार के तरफ से तनख्वाह भी दी जाती है, वो आखिर पूरे दिन कहां और कौन से जरूरी कार्यों में व्यस्त रहते हैं कि उन्हें विद्यालय में समय से पहुंचा कर बच्चों को शिक्षा देने की फुर्सत तक नसीब नहीं होती।
✓ सूत्रों की मानें तो इन अध्यापकों की तनख्वाह कितनी होगी।
कुशीनगर में संस्कृत उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के अध्यापक का वेतन, उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा सहायता प्राप्त संस्कृत विद्यालयों के शिक्षकों के वेतन में हाल ही में की गई वृद्धि के अनुसार, हाई स्कूल के शिक्षकों के लिए लगभग 20,000 रुपये प्रतिमाह और इंटरमीडिएट के शिक्षकों के लिए लगभग 25,000 रुपये प्रति माह होगा, according to news sources. यह वृद्धि, जो पहले क्रमशः 12,000 रुपये और 15,000 रुपये थी, को अप्रैल 2025 में मंजूरी दी गई थी!
विस्तार से :-
उत्तर प्रदेश सरकार ने सहायता प्राप्त संस्कृत माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों के वेतन में वृद्धि की है। इस वृद्धि के अनुसार, हाई स्कूल के शिक्षकों को अब 20,000 रुपये प्रति माह मिलेंगे, जबकि इंटरमीडिएट के शिक्षकों को 25,000 रुपये प्रति माह मिलेंगे।
यह निर्णय कैबिनेट द्वारा बाई सर्कुलेशन लिया गया था, जिसमें पूर्व मध्यमा (हाई स्कूल) और उत्तर मध्यमा (इंटरमीडिएट) के संस्कृत शिक्षकों के मानदेय में क्रमशः 8,000 रुपये और 10,000 रुपये की वृद्धि की गई थी! इससे पहले, पूर्व मध्यमा के शिक्षकों को 12,000 रुपये प्रति माह मिलते थे, जिसे बढ़ाकर 20,000 रुपये कर दिया गया है, इसी तरह, उत्तर मध्यमा के शिक्षकों को पहले 15,000 रुपये प्रति माह मिलते थे, जिसे बढ़ाकर 25,000 रुपये कर दिया गया है।
यह वृद्धि शिक्षकों की लंबे समय से चली आ रही मांग को ध्यान में रखते हुए की गई है।