कुशीनगर के शिक्षक की आत्महत्या से मचा हड़कंप: सुसाइड नोट में शिक्षा विभाग पर 16 लाख की धन-उगाही और प्रताड़ना के आरोप।

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धनंजय कुमार पाण्डेय, आपकी आवाज़ न्यूज़, कुशीनगर

∆ चार पन्नों का सुसाइड नोट और वीडियो में खोले चौंकाने वाले राज!

∆ देवरिया शिक्षा विभाग के अफसरों-कर्मचारियों पर 16 लाख रुपये ऐंठने का आरोप!

∆ पत्नी और दो मासूम बच्चों को छोड़ गया 37 वर्षीय शिक्षक!

∆ हरैया बुजुर्ग से गुलरिहा तक पसरा मातम, परिवार ने की निष्पक्ष जांच की मांग!

∆ शिक्षक संगठनों में आक्रोश, दोषियों पर कठोर कार्रवाई की उठी मांग!

कुशीनगर जनपद में शिक्षा विभाग की कथित प्रताड़ना से तंग आकर एक शिक्षक द्वारा आत्महत्या किए जाने का मामला सामने आया है, जिसने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। कुशीनगर जिले के हरैया बुजुर्ग निवासी 37 वर्षीय शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह ने फंदे से लटककर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली।
बताया जा रहा है कि आत्महत्या से पहले उन्होंने चार पन्नों का सुसाइड नोट लिखा और एक वीडियो भी बनाया, जिसमें देवरिया शिक्षा विभाग के कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों पर 16 लाख रुपये की अवैध वसूली और लगातार मानसिक प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगाए हैं।
घटना गुलरिहा के शिवपुर सहबाजगंज नहर रोड स्थित उनके बड़े भाई अवधेश सिंह के घर की है, जहां वह अपने परिवार के साथ रह रहे थे। कृष्ण मोहन सिंह तीन भाइयों में मंझले थे। बड़े भाई विदेश में कार्यरत हैं, जबकि छोटा भाई घर पर रहता है।
मृतक शिक्षक अपने पीछे पत्नी गुड़िया, आठ वर्षीय बेटी आस्था और छह वर्षीय बेटे आदित्य को छोड़ गए हैं। घटना के बाद परिवार में कोहराम मचा हुआ है। पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल है और मासूम बच्चों की आंखों में अपने पिता के लिए सवाल तैर रहे हैं।
परिजनों का आरोप है कि विभागीय दबाव और आर्थिक शोषण से कृष्ण मोहन बेहद परेशान थे। सुसाइड नोट और वीडियो के सामने आने के बाद मामले ने गंभीर रूप ले लिया है। परिवार ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच कर दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। मामले की जांच शुरू कर दी गई है। सूत्रों के अनुसार, सुसाइड नोट और वीडियो की सत्यता की भी जांच की जा रही है।
इस घटना से शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। शिक्षक संगठनों में भी आक्रोश देखा जा रहा है। उनका कहना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो दोषियों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि भविष्य में किसी और शिक्षक को इस तरह का कदम उठाने पर मजबूर न होना पड़े।
अब सबकी निगाहें प्रशासनिक जांच और सरकार की कार्रवाई पर टिकी हैं।

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