नई दिल्ली : विवादों के बाद रिलीज हुई द केरल स्टोरी 2, जानें क्या है प्रोपेगेंडा या रिसर्च आधारित है ये फिल्म?
डेस्क, आपकी आवाज़ न्यूज़
∆ कल 27 फरवरी 2026 दिन शुक्रवार की शाम को रिलीज हुई “द केरल स्टोरी 2”!
नई दिल्ली : “The Kerala Story 2” लंबी कानूनी लड़ाई और विवाद के बाद ‘द केरल स्टोरी’ रिलीज हो गई है! हालांकि इसे अपनी निर्धारित तारीख 27 फरवरी की सुबह ही सिनेमाघरों में पहुंच जाना चाहिए था, लेकिन कानूनी अड़चनों के कारण दोपहर तक स्टे हटाने का फैसला आया और रात तक फिल्म थिएटर्स में पहुंच सकी, कहीं शाम 7 बजे से शो शुरू हुए तो कहीं रात 8 बजे से पहले दिन कम टिकट बिक्री का नुकसान निर्माता को उठाना पड़ सकता है, क्योंकि यह सूचना सभी दर्शकों तक समय पर नहीं पहुंच पाई कि फिल्म रिलीज हो चुकी है! जैसा कि आप जानते हैं, ‘द केरल स्टोरी 2′ वर्ष 2023 में रिलीज हुई फिल्म ‘द केरल स्टोरी’ का सीक्वल है! छोटे बजट की होने के बावजूद पिछली फिल्म ने करीब 300 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार किया था! अब सबकी नजरें इसके दूसरे भाग पर हैं।
∆ द केरल स्टोरी की कास्ट!
फिल्म के निर्माता विपुल अमृतलाल शाह हैं, जिन्होंने पहली फिल्म भी प्रोड्यूस की थी! इस बार निर्देशन की जिम्मेदारी कामाख्या नारायण सिंह ने संभाली है, मुख्य कलाकारों में हैं! ऐश्वर्या ओजा, उल्का गुप्ता, अदिति भाटिया, पूर्वा पराग, सुमित गहलावत, अर्जन सिंह, युक्तम और अलका अमीन! कहानी लिखी है विपुल अमृतलाल शाह और अमरनाथ झा ने। रिलीज से पहले ही फिल्म को लेकर विवाद, चर्चा और सोशल मीडिया पर बहस तेज रही! कुछ लोग इसे प्रोपेगेंडा बता रहे थे, तो कुछ इसे गंभीर सामाजिक मुद्दे पर बनी फिल्म मान रहे थे! ऐसे माहौल में दर्शक एक पूर्वाग्रह के साथ थिएटर में प्रवेश करता है! क्या यह सचमुच प्रोपेगेंडा है या किसी वास्तविक समस्या को ईमानदारी से दिखाने की कोशिश?
∆ द केरल स्टोरी 2 की कहानी और विषय!
5. फ़िल्म का बैकग्राउंड स्कोर फ़िल्म के साथ मेल खाता है और ना तो दृश्यों पर हावी होता है और ना ही लाउड है।
∆ क्या है अंतिम राय?
कुल मिलाकर, ‘द केरल स्टोरी 2′ ऐसी फिल्म है जिसे देखने के बाद आप पूरी तरह उदासीन नहीं रह सकते, यह सोचने पर मजबूर करती है! अगर आप खुले मन से फिल्म देखेंगे, तो इसमें चर्चा के योग्य कई पहलू मिलेंगे! फिल्म पसंद आएगी या नहीं, यह आपके नजरिये पर निर्भर करता है, लेकिन किसी भी फिल्म को, अगर एक धर्म विशेष के इर्द-गिर्द कहानी बुनी गई है! तो उसे पूरी तरह नकार देना भी गलत है, क्योंकि फिल्में समाज का आईना होती हैं! संभव है कि कई घटनाएं हमारे आसपास न घट रही हों या हमारी नजर उन पर न पड़ रही हो, लेकिन यदि किसी की नजर वहां पड़ती है तो उसे यह कहानी कहने की पूरी आजादी है! बशर्ते वह संवैधानिक सीमाओं और सेंसर बोर्ड के कानूनों के तहत बनाई गई हो, बाकी फैसला दर्शकों का है! वे इसे नकार भी सकते हैं और अपना भी सकते हैं।