पडरौना रेलवे स्टेशन रोड पर चल रहे, ज़मीनी विवाद पर बड़ा टकराव लेखपाल की भूमिका पर उठे सवाल।
डेस्क, आपकी आवाज़ न्यूज़, उत्तर प्रदेश
1. रेलवे स्टेशन रोड पर ज़मीन को लेकर बढ़ा विवाद।
2. दो पक्षों के बीच ज़मीन पर कब्ज़े को लेकर तनातनी।
3. विवादित भूमि पर दोनों पक्षों ने किया अपना-अपना दावा, एक का कब्जा दूसरा कोर्ट में।
4. प्रशासन की चुप्पी पर स्थानीय लोगों में बढ़ी बेचैनी…!
5. शांतिपूर्ण समाधान की मांग को लेकर लोगों में बढ़ रहा आक्रोश।

कुशीनगर जिले के पडरौना रेलवे स्टेशन रोड पर ज़मीन को लेकर चल रहा विवाद इन दिनों बेहद चर्चाओं में है। मामला न सिर्फ़ दो पक्षों के बीच तनातनी का कारण बना है, बल्कि यह न्यायालय और जिला प्रशासन के संज्ञान में भी पहुँच चुका है।
√ व्यापारी राजेश टीबड़ेवाल का दावा!

स्थानीय व्यापारी राजेश टीबेडवाल ने आरोपों को पूरी तरह ख़ारिज करते हुए कहा है कि संबंधित ज़मीन पर उनका कब्ज़ा अनाधिकृत नहीं है। उन्होंने बताया कि यह ज़मीन उन्होंने वर्ष 1977 में पडरौना राजदरबार परिवार से बाकायदा बैनामा लेकर खरीदी थी।
राजेश टीबेडवाल का कहना है कि विवादित भूमि लगभग पौने चार कठ्ठा है और इस पर उनका वैध हक बनता है। उन्होंने इसे “सुनियोजित साज़िश” करार देते हुए कहा कि विरोधी पक्ष बेबुनियाद आरोप लगाकर जनभावनाओं को भड़काने की कोशिश कर रहा है।
√ दूसरा पक्ष – मदरसा समिति का दावा!

इस विवाद का दूसरा पक्ष मदरसा समिति है। समिति के पदाधिकारियों का कहना है कि खतौनी के अभिलेखों में दर्ज भूमि कुल तीन एकड़ से अधिक है और वह मदरसे के नाम से दर्ज है।
मदरसा समिति का आरोप है कि कुछ प्रभावशाली लोग सरकारी भूमि व मदरसे की संपत्ति पर कब्ज़ा करने की नीयत से झूठे दस्तावेज़ों का सहारा ले रहे हैं।
√ अदालत में लंबित है मामला!

मामले की गंभीरता का अंदाज़ा इसी से लगाया जा सकता है कि यह विवाद अब सरकार बनाम मदरसा समिति के रूप में इलाहाबाद हाईकोर्ट में विचाराधीन है। दोनों पक्ष अपने-अपने दावों को दस्तावेज़ों के आधार पर मज़बूत करने में जुटे हुए हैं।
√ जिला प्रशासन भी अलर्ट!
ज़मीन विवाद की गूँज अब जिला प्रशासन तक पहुँच गई है। सूत्रों के मुताबिक़, प्रशासनिक अधिकारी इस पूरे मामले की तहकीकात कर रहे हैं।
कुशीनगर में पहले से ही भूमि विवादों की संख्या अधिक रही है और ऐसे मामलों में शांति-व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती है।
√ स्थानीय स्तर पर हलचल!
रेलवे स्टेशन रोड के व्यस्त बाज़ार क्षेत्र से जुड़ा होने के कारण यह विवाद स्थानीय व्यापारियों और आम जनता के बीच भी चर्चा का विषय बना हुआ है। लोगों का कहना है कि इस मामले को जल्द से जल्द सुलझाया जाना चाहिए, ताकि अनावश्यक तनाव और विवाद की स्थिति पैदा न हो।
अब देखने वाली बात यह होगी कि अदालत में चल रही सुनवाई और जिला प्रशासन की कार्यवाही से इस लंबे समय से चले आ रहे विवाद का समाधान किस दिशा में जाता है।
√ पडरौना व्यापारी राजेश टीबड़ेवाल ने हल्का लेखपाल की भूमिका पर उठाए सवालिया निशान।
पडरौना से बड़ी ख़बर – रेलवे स्टेशन रोड पर चर्चित ज़मीनी विवाद में अब नया मोड़ आ गया है। व्यापारी राजेश टीबड़ेवाल ने इस विवाद में हल्का लेखपाल की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
टीबड़ेवाल का कहना है कि उन्होंने वर्ष 1977 में पडरौना राजदरबार परिवार से पौने चार कठ्ठा ज़मीन का बाकायदा बैनामा कराया था। इसके बावजूद विरोधी पक्ष द्वारा कब्ज़े का दावा किया जा रहा है।
व्यापारी का आरोप है कि ज़मीन विवाद को लेकर लेखपाल की रिपोर्ट और व्यवहार में पक्षपात स्पष्ट झलक रहा है, जिससे पूरे मामले में प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी प्रश्नचिह्न खड़े हो रहे हैं।
गौरतलब है कि विवादित भूमि पर एक ओर व्यापारी राजेश टीबड़ेवाल अपने स्वामित्व का दावा कर रहे हैं, तो दूसरी ओर मदरसा प्रबंधन का कहना है कि खतौनी में यह भूमि तीन एकड़ से अधिक ज़मीन के साथ मदरसे के नाम दर्ज है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह मामला वर्षों से चल रहा है, लेकिन लेखपाल की संदिग्ध भूमिका ने विवाद को और अधिक जटिल बना दिया है।
अब देखना यह होगा कि प्रशासन निष्पक्ष जांच कर इस विवाद पर कब और कैसा निर्णय लेता है।