पडरौना शहर की यातायात व्यवस्था बदहाल, जाम बना स्थायी सिरदर्द।
धनंजय कुमार पाण्डेय, ब्यूरो चीफ, उत्तर प्रदेश
🔴 पडरौना में भीषण जाम, राहगीरों की बढ़ी मुश्किलें!
📍 घंटों जाम में फंसे रहे एंबुलेंस और स्कूली वाहन।
🔴 नगर प्रशासन की लापरवाही से जाम बना स्थायी समस्या!
📍 न तो ट्रैफिक पुलिस तैनात, न कोई वैकल्पिक मार्ग।
🔴 बाजारों में अतिक्रमण बना जाम की जड़!
📍 दुकानदारों द्वारा सड़क पर कब्जा, वाहन चालकों की आफत।
🔴 पडरौना की सड़कें बनीं धैर्य की परीक्षा!
📍 ऑफिस टाइम में यातायात पूरी तरह चरमराया।
🔴 जनता परेशान, प्रशासन बेखबर!
📍 स्थानीयों ने किया जाम की स्थायी समाधान की मांग।
पडरौना शहर में ट्रैफिक व्यवस्था की हालात दिन में जैसे-तैसे संभलती दिखती है, लेकिन शाम 7 बजते ही मानो ट्रैफिक पुलिस ‘गायब’ हो जाती है। रेलवे क्रॉसिंग, स्टेशन रोड, मेंन बाजार, चौराहा और सब्जी मंडी जैसे इलाकों में यातायात पूरी तरह बेकाबू हो जाता है।
शाम होते ही वाहन चालकों की मनमानी शुरू हो जाती है—नो पार्किंग जोन में गाड़ियां खड़ी करना, रॉन्ग साइड से आना और हॉर्न की तेज़ गूंज आम हो जाती है। ट्रैफिक कंट्रोल करने वाला कोई भी पुलिसकर्मी इन घंटों में नजर नहीं आता।
स्थानीय दुकानदारों और राहगीरों की मानें तो जब तक ट्रैफिक पुलिस मौजूद रहती है, स्थिति कुछ हद तक नियंत्रित रहती है। लेकिन 7 बजे के बाद, खासकर बाजार बंद होते वक्त, पूरा इलाका जाम की चपेट में आ जाता है।
नगरवासी बोले:
एक व्यापारी, कहते हैं, “हम हर रोज जाम में फंसते हैं। पुलिस सिर्फ सुबह-शाम कुछ देर दिखती है, उसके बाद गायब हो जाती है।”
रवि सिंह, एक छात्र ने कहा, “कोचिंग से लौटते वक्त हर दिन आधे घंटे जाम में फंसना पड़ता है। न कोई ट्रैफिक सिपाही दिखता है, न कोई नियम लागू होता है।”
प्रशासन की चुप्पी:
इस समस्या को लेकर कई बार शिकायतें की जा चुकी हैं, लेकिन न तो शिफ्ट सिस्टम में बदलाव हुआ, न ही रात की ट्रैफिक व्यवस्था को लेकर कोई ठोस पहल की गई।
जरूरत:
पड़रौना जैसे तेजी से बढ़ते शहर में 24×7 ट्रैफिक नियंत्रण की आवश्यकता है। शाम के समय ट्रैफिक सिपाहियों की मौजूदगी अनिवार्य होनी चाहिए ताकि जनता को जाम से राहत मिल सके और दुर्घटनाओं पर अंकुश लगे।
✓ पडरौना रेलवे क्रासिंग पर लग रहा भारी जाम!
रेलवे क्रॉसिंग पर जाम की समस्या अब पड़रौना नगर के नागरिकों के लिए रोज़ाना की पीड़ा बन चुकी है। खासकर पड़रौना मार्केट के पास स्थित रेलवे फाटक पर घंटों तक लगने वाला जाम लोगों की दिनचर्या को बुरी तरह प्रभावित कर रहा है। स्कूली बच्चों, ऑफिस जाने वालों, और मरीज़ों के लिए यह जाम जानलेवा बनता जा रहा है।
✓ सुबह-शाम भारी भीड़, एंबुलेंस भी फंसी:
सुबह 8 से 10 बजे और शाम 5 से 8 बजे तक इस क्रॉसिंग पर दोपहिया, चारपहिया, ई-रिक्शा और ट्रक तक फंसे रहते हैं। कई बार तो एंबुलेंस को भी निकलने में मुश्किल होती है। स्थानीय निवासी रामनारायण साह कहते हैं, “यह फाटक दिन में कई बार बंद होता है, और हर बार 15-20 मिनट के लिए जाम लग जाता है।”
स्थानीय प्रशासन बेपरवाह:
नगरवासियों का आरोप है कि कई बार रेलवे और नगर प्रशासन से स्थायी समाधान की मांग की गई, लेकिन अब तक केवल आश्वासन ही मिला है। न कोई फ्लाईओवर बना, न अंडरपास की योजना लागू हुई।
रेलवे फाटक पर फ्लाईओवर निर्माण
यातायात पुलिस की तैनाती
ट्रैफिक लाइट और सायरन सिस्टम
स्कूल और अस्पताल की गाड़ियों को प्राथमिकता
कुशीनगर, पडरौना – पडरौना नगर में जाम अब रोजमर्रा की समस्या बन गई है। सुबह-शाम ही नहीं, दोपहर में भी शहर की प्रमुख सड़कों पर वाहनों की लंबी कतारें देखी जा सकती हैं। बाजारों में अतिक्रमण, ट्रैफिक नियंत्रण की कमी और नगर प्रशासन की लापरवाही ने मिलकर इस जाम को एक स्थायी संकट का रूप दे दिया है।
✓ स्कूल वाहन और एंबुलेंस भी फंसे!
शहर के प्रमुख चौराहों – पोस्ट ऑफिस चौराहा, गांधी चौक और नगर पालिका मार्ग पर स्थिति सबसे ज्यादा भयावह रहती है। सोमवार की सुबह करीब एक घंटे तक एक एंबुलेंस जाम में फंसी रही, जिससे मरीज को समय पर अस्पताल नहीं पहुंचाया जा सका। कई स्कूल बसें भी बच्चों के साथ जाम में घंटों फंसी रहीं।
✓ अतिक्रमण बना सबसे बड़ा कारण!
स्थानीय दुकानदारों द्वारा सड़कों पर कब्जा कर लेना जाम का एक प्रमुख कारण है। फुटपाथ तो कब के गायब हो चुके हैं और अब दुकानें आधी सड़क तक फैल चुकी हैं। इससे पैदल चलना भी दूभर हो गया है।
✓ जाम पर प्रशासनिक मौन और जनाक्रोश!
नगरपालिका और ट्रैफिक विभाग की निष्क्रियता को लेकर लोगों में भारी रोष है। नागरिकों का कहना है कि प्रशासन को कई बार ज्ञापन दिया गया, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है।
स्थानीय निवासी रमेश जी का कहना है, “यहां ट्रैफिक पुलिस का नामोनिशान तक नहीं दिखता। कोई योजना नहीं है, कोई प्रबंधन नहीं। यह स्थिति दुर्घटनाओं को न्योता दे रही है।”
✓ जनता ने उठाई स्थायी समाधान की मांग!
पडरौना के नागरिक अब ठोस समाधान की मांग कर रहे हैं – जैसे कि
✓ सड़क से अतिक्रमण हटाया जाए!
✓ ट्रैफिक पुलिस की नियमित तैनाती हो!
✓ भीड़भाड़ वाले समय में वैकल्पिक रूट तैयार किया जाए!
✓ CCTV और चालान की व्यवस्था लागू की जाए!
जब तक प्रशासन इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाता, तब तक जाम की समस्या यूं ही लोगों को रुलाती रहेगी।