कुशीनगर : पूर्वांचल के जननायक स्व. सीपीएन सिंह जी की पुण्यतिथि पर उमड़ा जनसैलाब, राजदरबार में श्रद्धांजलि सभा में गूँजी भावनाएँ।

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धनंजय कुमार पाण्डेय, व्यूरो चीफ, उत्तर प्रदेश

∆ स्व. सीपीएन सिंह की पुण्यतिथि पर उमड़ा अद्भुत जनसैलाब, राजदरबार में गूँजी भावनाओं की प्रतिध्वनि।

∆ पूर्वांचल के जननायक को नमन — हजारों लोगों ने कहा, “सीपीएन सिंह सिर्फ नेता नहीं, हमारी आत्मा का हिस्सा हैं।”

∆ पडरौना राजदरबार में श्रद्धांजलि सभा बनी भावुकता का केंद्र, समाजसेवियों ने झुककर अर्पित किए श्रद्धासुमन।

∆ जनसेवक की यादों ने भिगो दिए दिल—लोग बोले, “सिंह साहब जैसे नेतृत्व को युगों-युगों तक नहीं भुलाया जा सकता।”

∆ सीपीएन सिंह की सादगी और संघर्ष को याद कर भावुक हुए लोग, कहा—“सच्चे जननेता कभी विदा नहीं होते।”

पडरौना/कुशीनगर 26 नवम्बर 2025
पूर्वांचल के लोकप्रिय जनसेवक, पूर्व केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री एवं जनता के दिलों में आज भी अमिट स्थान रखने वाले स्वर्गीय सीपीएन सिंह जी की पुण्यतिथि पर आज पडरौना राजदरबार में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में श्रद्धांजलियों का सैलाब उमड़ पड़ा। समाजसेवी, बुद्धिजीवी, जनप्रतिनिधि, किसान, व्यापारी व हजारों की संख्या में पहुंचे ग्रामीणों ने इस महान विभूति को नमन करते हुए पुष्पांजलि अर्पित की।

राजदरबार प्रांगण सुबह से ही लोगों की भीड़ से खचाखच भरा दिखाई दे रहा था। हर कोई अपने जननायक के प्रति सम्मान और भावुकता से परिपूर्ण नजर आया। श्रद्धांजलि सभा के दौरान वक्ताओं ने स्व. सिंह के व्यक्तित्व एवं कृतित्व को याद करते हुए कहा कि वे ऐसे नेतृत्वकर्ता थे जिन्होंने हमेशा जनहित को सर्वोपरि रखा। गरीबों, किसानों और वंचितों की आवाज को राष्ट्रीय स्तर तक पहुँचाने का कार्य उन्होंने दृढ़ता व संकल्प के साथ किया।

वक्ताओं ने यह भी कहा कि स्व. सीपीएन सिंह का राजनीतिक जीवन सादगी, पारदर्शिता और सेवा भाव का अद्वितीय उदाहरण रहा। रक्षा राज्य मंत्री रहते हुए भी उन्होंने क्षेत्र की समस्याओं को कभी नज़रअंदाज़ नहीं किया। पडरौना ही नहीं, पूरे पूर्वांचल के लोग आज भी उन्हें एक सच्चे हितैषी और मार्गदर्शक के रूप में याद करते हैं।

सभा में उपस्थित समाजसेवियों ने स्व. सिंह के बताए रास्ते पर चलने का संकल्प लेते हुए कहा कि आज समाज को उनकी विचारधारा, उनकी सादगी और संघर्षशीलता की पहले से कहीं अधिक आवश्यकता है।

श्रद्धांजलि सभा के अंत में दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत नेता की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की गई। उनके प्रति लोगों की भावनाएँ यह बताती हैं कि सच्चे जननेता कभी मरते नहीं, वे लोगों के दिलों में सदैव जीवित रहते हैं।

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