कुशीनगर : रानी लक्ष्मीबाई जयंती पर पूनम जायसवाल ने बहनों को खिलाई मिठाई, वीरांगना के साहस और संघर्ष की दिलाई याद।
धनंजय कुमार पाण्डेय, व्यूरो चीफ, उत्तर प्रदेश
√ रानी लक्ष्मीबाई जयंती पर महिलाओं की जुटी शक्ति—पूनम जायसवाल ने मिठाई बांटकर बढ़ाया उत्साह!
√ “हर महिला में है लक्ष्मीबाई का साहस”—पूनम जायसवाल ने बहनों को दिलाई वीरांगना की प्रेरणा!
√ खिरकिया में गूंजा राष्ट्रभक्ति का स्वर—व्यापार मंडल महिला टीम ने दी रानी लक्ष्मीबाई को कोटि-कोटि नमन!
√ “देशहित में एकजुट हों महिलाएं”—रानी लक्ष्मीबाई के आदर्शों पर चलने का बहनों ने लिया संकल्प!
√ वीरांगना के वीरत्व की गाथा सुन भावुक हुई महिलाएं—अनीता मौर्या व टीम की रही विशेष मौजूदगी!

पडरौना/खिरकिया 19 नवम्बर 2025
पूर्वांचल व्यापार मंडल प्रदेश अध्यक्ष श्री राजेश सैनी के निर्देश पर आज पडरौना विधानसभा के खिरकिया में रानी लक्ष्मीबाई जयंती का कार्यक्रम बड़े ही सम्मान और उत्साह के साथ आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अगुवाई व्यापार मंडल महिला जिला अध्यक्ष पूनम जायसवाल ने की, जिन्होंने अपनी बहनों के साथ मिलकर वीरांगना झांसी की रानी लक्ष्मीबाई को नमन करते हुए मिठाई वितरित कर जयंती की शुभकामनाएं दीं।
इस अवसर पर पूनम जायसवाल ने उपस्थित महिलाओं को रानी लक्ष्मीबाई के अदम्य साहस, असाधारण सैन्य नेतृत्व, मातृ-समर्पण और राष्ट्रभक्ति के प्रेरक प्रसंगों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि “हर भारतीय महिला के भीतर रानी लक्ष्मीबाई जैसी हिम्मत और शक्ति निहित है। यदि हम उनके जीवन से प्रेरणा लेकर राष्ट्रहित में कदम बढ़ाएँ, तो हम भी समाज और देश में नई पहचान बना सकती हैं।”

उन्होंने रानी लक्ष्मीबाई के जीवन की झलक पेश करते हुए बताया कि रानी लक्ष्मीबाई का जन्म 19 नवंबर 1828 को वाराणसी में हुआ था। बचपन में उन्हें मणिकर्णिका नाम से जाना जाता था और लोग उन्हें स्नेह से मनु तांबे कहकर पुकारते थे। उनकी शादी झांसी के राजा गंगाधर राव से हुई थी। वर्ष 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में रानी लक्ष्मीबाई ने असाधारण वीरता दिखाते हुए अंग्रेजों के खिलाफ मोर्चा संभाला।
उन्होंने अपने नन्हे पुत्र को पीठ पर बांधकर युद्धभूमि में जिस पराक्रम का प्रदर्शन किया, वह भारतीय इतिहास का अमर अध्याय बन चुका है। अंततः देश की आज़ादी के लिए लड़ते हुए वह वीरगति को प्राप्त हुईं।
कार्यक्रम में व्यापार महिला मंडल अध्यक्ष अनीता मौर्या भी अपनी बहनों के साथ मौजूद रहीं। सभी ने रानी लक्ष्मीबाई के विचारों और त्याग को आत्मसात करने का संकल्प व्यक्त किया।
कार्यक्रम के दौरान महिलाओं में विशेष उत्साह देखने को मिला और सभी ने एक स्वर में कहा कि रानी लक्ष्मीबाई जैसी राष्ट्रनायिका सदैव हमारे लिए प्रेरणा स्रोत रहेंगी।