कुशीनगर/खड्डा विकास खण्ड में बिना मान्यता के धड़ल्ले से चल रहा स्कूल, बेखबरी की नींद में जिम्मेदार अधिकारी।
धनंजय कुमार पाण्डेय, व्यूरो चीफ, उत्तर प्रदेश
• कुशीनगर में शिक्षा विभाग की नींद—बिना मान्यता के स्कूल धड़ल्ले से संचालित!
• एच.एन.सेंट्रल पब्लिक स्कूल पर बड़ा सवाल—बच्चों का भविष्य अधर में, अफसर मौन, कार्यालय में बैठ तोड़ रहे कुर्सियां।
• शिक्षा व्यवस्था पर प्रशासन का शिकंजा ढीला- नो मान्यता, नो जांच, सब धंधा चालू!
• मानक विहीन और बिना मान्यता के अवैध स्कूलों पर रोक कब लगाएगा जिला प्रशासन? योगी सरकार के नियमों की खुलकर उड़ाई जा रही धज्जियां।
• नियम-कायदों की उड़ाई जा रही धज्जियाँ—सरकार के आदेश कागजों तक सीमित!
• जिम्मेदारों की मिलीभगत या लापरवाही?—शिक्षा विभाग पर उठे सवालों के बवंडर!
कुशीनगर/खड्डा।
खड्डा विकास खंड के हीरा छपरा गांव में शिक्षा व्यवस्था को ठेंगा दिखाते हुए एच.एन.सेंट्रल पब्लिक स्कूल नामक विद्यालय बिना मान्यता के ही खुलेआम संचालित किया जा रहा है। हैरानी की बात यह है कि, इस स्कूल के पास न तो शिक्षा विभाग से मान्यता है और न ही अनिवार्य शैक्षिक मानकों का अनुपालन। इसके बावजूद स्कूल में बच्चों की पढ़ाई धड़ल्ले से चल रही है।
🔴 अभिभावक अनजान, बच्चे जोखिम में!
सूत्रों का कहना है कि, स्कूल प्रबंधन द्वारा बड़े-बड़े दावे कर अभिभावकों से फीस तो वसूल की जा रही है, लेकिन हकीकत यह है कि, “विद्यालय की मान्यता तक शिक्षा विभाग की फाइलों में दर्ज नहीं है।” ऐसे में बच्चों का भविष्य अधर में लटका हुआ है।
🔴 शिक्षा विभाग की बड़ी लापरवाही!
नियमों के अनुसार किसी भी निजी विद्यालय के संचालन के लिए अनिवार्य रूप से बेसिक शिक्षा विभाग से मान्यता, सुरक्षा और आधारभूत सुविधाओं की पूर्ति करना आवश्यक होता है। लेकिन एच.एन.सेंट्रल पब्लिक स्कूल ने सभी मानकों को दरकिनार कर दिया है। सवाल यह उठता है कि शिक्षा विभाग के जिम्मेदार अधिकारी आखिर क्यों आँख मूँदकर बैठे हैं?
🔴 विद्यालय चलाने हेतु सरकारी नियम
सरकार ने स्पष्ट प्रावधान किया है कि कोई भी निजी विद्यालय तभी संचालित हो सकता है जब वह कुछ अनिवार्य व शर्तों को पूरा करे—
1. बेसिक शिक्षा विभाग से मान्यता (Recognition Certificate): बिना मान्यता प्राप्त किए कोई भी विद्यालय छात्रों का दाखिला नहीं ले सकता।
2. भवन एवं सुरक्षा मानक: विद्यालय भवन पुख्ता होना चाहिए, अग्निशमन (फायर सेफ्टी) के इंतज़ाम अनिवार्य हैं।
3. पेयजल एवं स्वच्छ शौचालय की सुविधा: बच्चों के लिए शुद्ध पेयजल और लड़के-लड़कियों हेतु अलग शौचालय होना चाहिए।
4. योग्य शिक्षक: शिक्षक को सरकार द्वारा निर्धारित योग्यता के अनुसार नियुक्त किया जाना चाहिए।
5. बच्चों के अधिकारों की रक्षा: शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE-2009) के अनुसार फीस वसूली और बच्चों के साथ भेदभाव पर रोक है।
6. निरीक्षण व नवीनीकरण: विद्यालय को समय-समय पर शिक्षा विभाग से निरीक्षण कराना होता है और मान्यता का नवीनीकरण कराना जरूरी है।
🔴 सवालों के घेरे में शिक्षा विभाग!
एच.एन. सेंट्रल पब्लिक स्कूल इन नियमों का अनुपालन नहीं कर रहा, बावजूद इसके प्रशासनिक स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। सूत्रों का कहना है कि अफसर आखिर किस दबाव में इस तरह के विद्यालयों का संचालन लगातार कई वर्षों से होने दे रहे हैं। अवैध रूप से चल रहे इस विद्यालय को बंद कराया जाए और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए। पब्लिक स्कूल इन नियमों का अनुपालन नहीं कर रहा, बावजूद इसके प्रशासनिक स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं की गई।
√ बिना मान्यता के स्कूल चलाने पर होगी कड़ी कार्रवाई!
शिक्षा के क्षेत्र में सुधार और गुणवत्तापूर्ण पढ़ाई सुनिश्चित करने के लिए सरकार समय-समय पर सख्त नियम लागू करती है। बावजूद इसके कई जगहों पर बिना मान्यता (Recognition) के स्कूल धड़ल्ले से संचालित हो रहे हैं। शिक्षा विशेषज्ञों और कानूनविदों का कहना है कि यह न केवल शिक्षा के अधिकार अधिनियम (RTE Act 2009) का उल्लंघन है, बल्कि बच्चों के भविष्य के साथ भी खिलवाड़ है।
√ बिना मान्यता के स्कूल चलाने पर क्या है कानूनी प्रावधान?
शिक्षा विभाग के नियमों के मुताबिक:
बिना मान्यता स्कूल संचालित करना गैरकानूनी है।
शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 की धारा 18 के अनुसार, बिना मान्यता के चल रहे विद्यालयों पर एक लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
अगर विद्यालय लगातार बिना मान्यता के चलता रहता है तो प्रतिदिन 10,000 रुपये तक का अतिरिक्त जुर्माना लगाया जा सकता है।
√ ऐसे स्कूलों को तत्काल बंद कराने का भी प्रावधान है।
ऐसे जिम्मेदार विद्यालय संचालकों पर फौजदारी मुकदमा दर्ज कर उन्हें जेल तक भेजा जा सकता है।
√ शिक्षा विभाग की क्या है जिम्मेदारी?
शिक्षा विभाग के द्वारा समय-समय पर विद्यालयों का निरीक्षण करना अनिवार्य है। यदि किसी संस्था को आवश्यक मानक पूरे किए बिना स्कूल चलाते पाया जाता है, तो सर्वप्रथम उसे नोटिस जारी किया जाता है। नोटिस की अवधि पूरी होने पर भी सुधार न होने पर स्कूल सीज करने जैसी कड़ी कार्रवाई की जाती है।
√ दांव पर बच्चों का भविष्य!
बिना मान्यता वाले विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों की डिग्री और प्रमाणपत्र भविष्य में मान्य नहीं होते। ऐसे में बच्चे उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं में पीछे रह जाते हैं।
√ क्या बोले बेसिक शिक्षा अधिकारी?
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) का कहना है कि, “किसी भी परिस्थिति में बिना मान्यता के स्कूल संचालित नहीं किया जा सकता। ऐसे संस्थानों पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी और जरूरत पड़ी तो मुकदमा दर्ज कर संचालकों को जेल भी भेजा जाएगा।”
• कुल मिलाकर बिना मान्यता स्कूल चलाना न केवल अवैध है बल्कि बच्चों के भविष्य के साथ सीधा खिलवाड़ है। सरकार और प्रशासन ने साफ कर दिया है कि अब ऐसे स्कूल संचालकों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
√ शिक्षकों के अधिकारों का हनन!
एच.एन. सेंट्रल पब्लिक स्कूल पर आरोप है कि प्रबंधन समय-समय पर शिक्षकों का वेतन रोकता रहा है। शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यह श्रम कानूनों का भी उल्लंघन है। वेतन भुगतान में जानबूझकर देरी करना या रोकना श्रम कानून और सेवा शर्तों का उल्लंघन माना जाएगा, जिस पर श्रम विभाग द्वारा गंभीर कार्रवाई करना संभव है।
साफ है कि एच.एन. सेंट्रल पब्लिक स्कूल के मामले में शिक्षा विभाग और प्रशासन दोनों की नज़रें टिकी हुई हैं। अब देखना होगा कि बिना मान्यता संचालन और वेतन विवाद जैसे गंभीर आरोपों पर विभाग द्वारा कार्रवाई कितनी तेज़ और सख्त होती है।