कुशीनगर : यातायात विभाग की लापरवाही उजागर — चलती सड़क पर ऑटो पकड़ कर चलता रहा युवक, ड्राइवर बना रहा बेपरवाह।
धनंजय कुमार पाण्डेय, व्यूरो चीफ, उत्तर प्रदेश
🔴 मुख्य सड़क पर युवक चलता रहा ऑटो पकड़ कर, यातायात नियमों का डर गायब!
🔴 पडरौना में यातायात व्यवस्था पटरी से उतरी, सड़क सुरक्षा रामभरोसे!
🔴 ऑटो चालक चलता रहा बेखौफ़ — युवक की जान से खिलवाड़, विभाग मौन!
🔴 नियम तोड़ने वालों की चांदी — यातायात विभाग की नहीं खुल रही नींद!
🔴 किस्मत के भरोसे शहर की सड़कें… ट्रैफिक कर्मियों की जवाबदेही पर सवाल!

पडरौना। शहर में यातायात व्यवस्था को लेकर विभाग के दावों की पोल उस समय खुल गई जब बलुचाहा पुल से लेकर पश्चिम दिशा की ओर अगले लमुआ पुल तक एक युवक खुलेआम ऑटो पकड़ कर चलता रहा। तस्वीरों में साफ दिख रहा है कि युवक न केवल ऑटो पकड़कर खतरनाक तरीके से चल रहा था, बल्कि सामने से लगातार वाहन भी आ–जा रहे थे। इसके बावजूद ऑटो चालक ने उसे रोकने या डांटने तक की जरूरत नहीं समझी।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह स्टंट नहीं, बल्कि रोजमर्रा का नज़ारा बन चुका है, और यातायात पुलिस किसी भी तरह की कार्रवाई करने में नाकाम दिखाई दे रही है। न तो ऐसे ऑटो चालकों पर रोक लग रही है, न ही सड़क पर जान जोखिम में डालने वालों पर कोई कार्रवाई होती दिख रही है।
शहर में तैनात यातायात विभाग की यह लापरवाही किसी बड़े हादसे को न्योता दे सकती है। सवाल यह है कि जब मुख्य सड़क पर इतने खतरनाक तरीके से नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हों, तो पुलिस पेट्रोलिंग और निगरानी आखिर कहां है?

यातायात व्यवस्था रामभरोसे — ऑटो से पकडकर चलता रहा युवक, ड्राइवर और ट्रैफिक पुलिस दोनों बेपरवाह!
सड़क पर मौत से खेलने वालों पर कोई कार्रवाई नहीं, यातायात विभाग की कार्यशैली पर उठे गंभीर सवाल
पडरौना। शहर में तैनात यातायात विभाग की बड़ी लापरवाही एक बार फिर खुलकर सामने आई है। बलुचाहा पुल से लेकर पश्चिम दिशा के अगले पुल तक एक युवक खुलेआम ऑटो को पकड़कर चलता रहा—वह भी लंबी दूरी तक। सड़क पर लगातार आ-जा रहे वाहनों के बीच यह खतरनाक हरकत किसी भी बड़े हादसे में बदल सकती थी, लेकिन सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि ऑटो चालक पूरे रास्ते बेखबर नहीं, बल्कि पूरी जानकारी के साथ इस खतरनाक सफर को जारी रखे रहा। ड्राइवर ने न रोका, न टोकने की जहमत उठाई।
∆ यातायात कर्मियों की अनुपस्थिति या अनदेखी?

यह सड़क शहर की व्यस्त सड़क मानी जाती है, लेकिन हादसे को दावत देने वाले इस पूरे घटनाक्रम के दौरान कहीं भी ट्रैफिक पुलिस नजर नहीं आई। सवाल खड़े होते हैं—
∆ ट्रैफिक पेट्रोलिंग आखिर होती कहां है?
क्या यातायात विभाग केवल कागजी कार्यवाही और दिखावे तक सीमित हो गया है? सड़क सुरक्षा पर तैनात कर्मचारी सिर्फ औपचारिकता निभा रहे हैं?
स्थानीय लोगों का कहना है कि न तो इस रूट पर नियमित जांच होती है और न ही नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई। कई बार ऐसे खतरनाक दृश्य आम बात हो चुके हैं, लेकिन ट्रैफिक पुलिस या तो मौके पर होती ही नहीं या देखकर भी अनदेखा कर देती है।
∆ ऑटो ड्राइवर की मनमानी या विभाग की चुप्पी?
ऑटो चालकों पर न तो फिटनेस की जांच, न सीटिंग क्षमता का पालन और न ही यात्री सुरक्षा का ध्यान—शहर में संचालित अधिकांश ऑटो बिना किसी नियमन के सड़कों पर दौड़ रहे हैं।
लेकिन इन सबके बीच विभाग की चुप्पी कई सवाल खड़े करती है।
क्या यातायात विभाग के कर्मचारी सिर्फ व…, तक सीमित हो गए हैं?
क्या सड़क पर नियम तोड़ने वालों को खुली छूट दे दी गई है?
किसी भी क्षण हो सकता था बड़ा हादसा!
जिस तरह युवक लंबे समय तक ऑटो पकड़कर सड़क पर साईकिल दौड़ाता रहा, वह जान जोखिम में डालने वाली हरकत थी। सामने से आते वाहन, संकरी सड़क और तेज रफ्तार—इन तीनों का संयोजन किसी भी क्षण एक बड़े हादसे का कारण बन सकता था। लेकिन विभाग का रवैया इतना सुस्त कि उन्हें न कोई खतरा दिखता है, और न ही जिम्मेदारी का एहसास।
नागरिकों की नाराजगी — “यातायात विभाग सिर्फ नाम का रह गया”
स्थानीय लोगों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि विभाग की मौजूदगी के बावजूद सड़क सुरक्षा शून्य है। लोगों का कहना है—
“जब शहर के बीचोबीच यातायात विभाग नियमों का पालन नहीं करा पा रही है, तो बाकी जगह कौन देखता है”
“नियम तोड़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई कब होगी?”
कड़ी कार्रवाई की मांग –
नागरिकों ने जिला प्रशासन और पुलिस अधीक्षक से मांग की है कि—
मामले में शामिल ऑटो चालक पर कड़ी कार्रवाई हो।
इस रूट पर ट्रैफिक पुलिस की नियमित तैनाती सुनिश्चित की जाए, और लापरवाह यातायात कर्मियों की जवाबदेही तय हो।
पडरौना नगर में बढ़ता ट्रैफिक अराजकता का माहौल अब किसी बड़े हादसे की चेतावनी दे रहा है। अगर अभी भी यातायात विभाग नहीं जागा, तो इसकी कीमत शहर को भारी दुर्घटनाओं के रूप में चुकानी पड़ सकती है।