कुशीनगर की आशा, आया व संगिनी फेसिलिटेटर बहनों ने मुख्यमंत्री को भेजा ज्ञापन”
धनंजय कुमार पाण्डेय, व्युरो चीफ, उत्तर प्रदेश
∆ “18 साल की सेवा के बाद भी क्यों मिला सौतेला व्यवहार?”
∆ “आशा-संगिनी बहनों ने निभाई जिम्मेदारी, अब सरकार निभाए वादा!”
∆ “मां-शिशु की जान बचाने वाली बहनों का हक़ कब मिलेगा?”
∆ “समान कार्य के लिए समान वेतन — बस यही तो मांग है हमारी!”
∆ “राज्य स्वास्थ्य कर्मचारी का दर्जा दो — सम्मान से जीने का हक दो!”
∆ “संगिनी को भी मिले 30 दिन का मानदेय — 24 दिन का नहीं!”

कुशीनगर 01 नवम्बर 2025
कुशीनगर जनपद की आशा, आया एवं संगिनी फेसिलिटेटर बहनों ने मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश सरकार को संबोधित एक ज्ञापन जिलाधिकारी महोदय को सौंपा है। ज्ञापन में उन्होंने अपने कार्यों, वर्षों की सेवा और समर्पण के बावजूद लगातार उपेक्षा और असमानता की शिकायत की है।
फेसिलिटेटर बहनों का कहना है कि वे बीते 18 वर्षों से स्वास्थ्य विभाग के हर कार्य — जैसे मातृ एवं शिशु देखभाल, टीकाकरण, पोषण, संस्थागत प्रसव, जननी सुरक्षा योजना आदि में दिन-रात मेहनत करती आ रही हैं। उन्होंने कहा कि मातृ मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर कम करने में उनकी भूमिका अहम रही है, बावजूद इसके उन्हें राज्य स्वास्थ्य कर्मचारी का दर्जा नहीं दिया गया है।

प्रमुख मांगे इस प्रकार हैं :
1️⃣ राज्य स्वास्थ्य कर्मचारी का दर्जा दिया जाए, ताकि आशा बहनों को सरकारी कर्मचारी के समान सुविधाएं मिल सकें।
2️⃣ समान कार्य समान वेतन का सिद्धांत लागू किया जाए।
3️⃣ ई-कवच पर कार्य हेतु स्मार्ट फोन उपलब्ध कराए जाएं, ताकि डिजिटल कार्य सुगमता से हो सके।
4️⃣ तीज, करवाचौथ, दशहरा, दीपावली जैसे प्रमुख त्यौहार बीत जाने के बावजूद अभी तक कई बहनों का भुगतान नहीं हुआ — इसे तत्काल जारी किया जाए।
5️⃣ वकाया मानदेय और प्रोत्साहन राशि का भुगतान शीघ्र किया जाए।
6️⃣ प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (PMMVY) का कार्य पुनः आशा कार्यकर्ताओं को सौंपा जाए।
7️⃣ संगिनी फेसिलिटेटर को 24 दिन के बजाय पूरे 30 दिन का मानदेय दिया जाए।
8️⃣ फील्ड विजिट के लिए यातायात भत्ता प्रदान किया जाए।
∆ बहनों की व्यथा — “हमने सेवा की, अब सरकार से सेवा का उत्तर चाहिए”
आशा-संगिनी बहनों ने कहा कि “हमने अपनी जान की परवाह किए बिना महामारी और आपातकालीन परिस्थितियों में भी काम किया। गांव-गांव जाकर गर्भवती महिलाओं, नवजात शिशुओं और माताओं की देखभाल की, लेकिन अब जब हमारे अधिकार की बात आती है, तो हमें अनदेखा कर दिया जाता है।”
उन्होंने आगे कहा कि “हम आशा हैं, उम्मीद की किरण हैं — हमें निराश मत करो। सरकार हमारी मांगों पर विचार करे और जल्द ठोस निर्णय ले।”
∆ जनहित से जुड़ी मांगें, नजरअंदाज नहीं की जानी चाहिए!

आशा एवं संगिनी फेसिलिटेटर बहनों की यह मांगें केवल उनके हित के लिए नहीं, बल्कि संपूर्ण स्वास्थ्य तंत्र की मजबूती से जुड़ी हैं। राज्य सरकार यदि इन्हें उचित दर्जा और सम्मान दे, तो ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं में और अधिक सुधार संभव होगा।
फिलहाल, जिलाधिकारी कुशीनगर ने ज्ञापन प्राप्त कर मामले को उच्चाधिकारियों तक पहुंचाने का आश्वासन दिया है। बहनों ने उम्मीद जताई है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्वयं इस विषय में संज्ञान लेकर जल्द निर्णय लेंगे, जिससे उन्हें न्याय और सम्मान दोनों प्राप्त हो सके।