कुशीनगर : झोलाछाप डॉक्टरों के भरोसे लोगों की जान! अवैध अस्पताल में ऑपरेशन, छापे की भनक लगते ही दीवार फांदकर भागे फर्जी डॉक्टर।
धनंजय कुमार पाण्डेय, व्यूरो चीफ, उत्तर प्रदेश
√ बिना डॉक्टर–बिना डिग्री चल रहा था अस्पताल!
√ स्वास्थ्य विभाग की टीम पहुंची, छत के रास्ते फरार हुआ झोलाछाप डॉक्टर!
√ जांच में खुलासा—अस्पताल का पंजीकरण कभी हुआ ही नहीं, पहले आवेदन किया गया था, लेकिन मानक पूरे न होने पर विभाग ने ही कर दिया था खारिज।
√ जांच के दौरान दो मरीजों थे भर्ती हालत गंभीर, मेडिकल कॉलेज रेफर।
∆ कार्रवाई के बाद भी बड़ा सवाल बरकरार!
इतने लंबे समय से अवैध अस्पताल कैसे चलता रहा?
क्या जिला स्वास्थ्य विभाग की निगरानी प्रणाली फेल रही?
अभी और कितने झोलाछाप अब भी लोगों की जान से खेल रहे हैं?
पडरौना (कुशीनगर)।
कोतवाली क्षेत्र के सिधुआं बाजार में सोमवार को स्वास्थ्य विभाग की मंडलीय टीम की छापेमारी ने जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी। कुशवाहा हेल्थ केयर के नाम से संचालित एक निजी अस्पताल में बिना किसी पंजीकरण, बिना योग्य डॉक्टर और बिना मानक सुविधाओं के ऑपरेशन किया जा रहा था।
पित्त की थैली और बवासीर के ऑपरेशन के नाम पर दो मरीजों की जान खतरे में, स्वास्थ्य विभाग ने तत्काल दोनों को मेडिकल कॉलेज कुशीनगर भेजा।
मंडलीय स्वास्थ्य टीम के पहुंचते ही ऑपरेशन कर रहा व्यक्ति खुद को “अरुण” बताकर कागज लाने के बहाने छत से दीवार फांदकर फरार हो गया, इतना ही नहीं अस्पताल संचालक भी मौके की नजाकत समझते हुए वहाँ से “नौ दो ईगारह” हो गया।
टीम ने मौके पर देखा कि एक गंदे व अव्यवस्थित कमरे में महिला का पित्त की थैली का ऑपरेशन किया जा रहा है। न तो ऑपरेशन थिएटर के मानक थे और न ही ऑपरेशन करने वाले व्यक्ति के पास कोई वैध डिग्री या लाइसेंस। टीम के पहुंचते ही झोलाछाप और अस्पताल संचालक फरार हो गए।
जांच में सामने आया कि उक्त अस्पताल पहले भी स्वास्थ्य विभाग के रडार पर आ चुका था, लेकिन अयोग्य पाए जाने पर इसका आवेदन खारिज कर दिया गया था। इसके बावजूद अस्पताल धड़ल्ले से संचालित होता रहा।
मामले की जानकारी मिलते ही सीएमओ डॉ. चंद्र प्रकाश के निर्देश पर अस्पताल को सील कर दिया गया और दोनों मरीजों को मेडिकल कॉलेज, कुशीनगर रेफर किया गया।
यह कार्रवाई भले ही एक चेतावनी हो, लेकिन सबसे बड़ा सवाल अब भी कायम है—
जब झोलाछाप खुलेआम ऑपरेशन कर रहे थे, तब जिला स्वास्थ्य विभाग की निगरानी कहां थी?
टीम ने मौके पर देखा कि एक गंदे व अव्यवस्थित कमरे में महिला का पित्त की थैली का ऑपरेशन किया जा रहा है। न तो ऑपरेशन थिएटर के मानक थे और न ही ऑपरेशन करने वाले व्यक्ति के पास कोई वैध डिग्री या लाइसेंस। टीम के पहुंचते ही झोलाछाप और अस्पताल संचालक फरार हो गए।
जांच में सामने आया कि उक्त अस्पताल पहले भी स्वास्थ्य विभाग के रडार पर आ चुका था, लेकिन अयोग्य पाए जाने पर इसका आवेदन खारिज कर दिया गया था। इसके बावजूद अस्पताल धड़ल्ले से संचालित होता रहा।
मामले की जानकारी मिलते ही सीएमओ डॉ. चंद्र प्रकाश के निर्देश पर अस्पताल को सील कर दिया गया और दोनों मरीजों को मेडिकल कॉलेज, कुशीनगर रेफर किया गया।
यह कार्रवाई भले ही एक चेतावनी हो, लेकिन सबसे बड़ा सवाल अब भी कायम है—
जब झोलाछाप खुलेआम ऑपरेशन कर रहे थे, तब जिला स्वास्थ्य विभाग की निगरानी कहां थी?
सिधुआं बाजार में कुशवाहा हेल्थ केयर नामक निजी अस्पताल बिना पंजीकरण और बिना मानक सुविधाओं के धड़ल्ले से संचालित, महिला का पित्त की थैली का ऑपरेशन करते मिला झोलाछाप।