कुशीनगर : उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद परीक्षा पर संकट, गोस्वामी तुलसीदास इंटर कॉलेज के 700 छात्र अधर में, डीआईओएस पर उठे सवाल।
धनंजय कुमार पाण्डेय, व्यूरो चीफ, उत्तर प्रदेश
∆ कुशीनगर में 700 परीक्षार्थियों की परीक्षा पर रोक, जिला विद्यालय निरीक्षक को आधिकारिक सूचना तक नहीं!
∆ पहले उत्तरपुस्तिका गायब, फिर रिजर्व प्रश्नपत्र से परीक्षा — और अब 700 परिक्षार्थियों का बड़ा विवाद।
∆ जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय कुशीनगर की कार्यशैली पर अभिभावकों और छात्रों में भारी रोष।
∆ माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की कार्रवाई से जनपद में मचा हड़कंप, भविष्य को लेकर छात्रों में असमंजस।
∆ लापरवाही या संरक्षण? जनपद की शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न।
∆ कुशीनगर जिला विधालय निरीक्षक कार्यालय में योगी सरकार के “जीरो टॉलरेंस नीति” का असर भी ‘जीरो’।

पडरौना/कुशीनगर।
जनपद की शिक्षा व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद द्वारा बोर्ड परीक्षाओं की तिथि घोषित किए जाने के बाद भी पडरौना नगर स्थित गोस्वामी तुलसीदास इंटर कॉलेज के लगभग 700 परीक्षार्थियों की परीक्षा पर रोक लगाए जाने की सूचना से शिक्षा महकमे में हड़कंप मच गया है। चौंकाने वाली बात यह है कि संबंधित विद्यालय और छात्र-छात्राओं को इस कार्रवाई की स्पष्ट जानकारी तक नहीं दी गई, जिससे उनका भविष्य अधर में लटक गया है।
सूत्रों के अनुसार बोर्ड स्तर पर किसी विभागीय त्रुटि अथवा अभिलेखीय अनियमितता के चलते उक्त विद्यालय के परीक्षार्थियों की परीक्षा अस्थायी रूप से रोक दी गई है। लेकिन जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय की ओर से समय रहते विद्यालय प्रशासन को सूचित न किए जाने पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। परीक्षा की तिथि नजदीक होने के बावजूद छात्र असमंजस की स्थिति में हैं।
यह पहला मामला नहीं है जब जिला विद्यालय निरीक्षक श्रवण कुमार गुप्ता के कार्यकाल में शिक्षा व्यवस्था विवादों में आई हो। इससे पूर्व उत्तर पुस्तिकाओं के गायब होने की घटना ने भी विभाग की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न लगाया था। वहीं एक अन्य प्रकरण में परीक्षा के दौरान मूल प्रश्नपत्रों के स्थान पर रिजर्व प्रश्नपत्रों से परीक्षा कराए जाने की बात सामने आई थी। उस समय भी निगरानी और पर्यवेक्षण को लेकर विभाग की भूमिका पर आलोचना हुई थी।
वर्तमान प्रकरण में अभिभावकों और विद्यार्थियों में भारी रोष व्याप्त है। उनका कहना है कि यदि समय रहते सूचना मिलती तो आवश्यक औपचारिकताएं पूर्ण कर ली जातीं और छात्रों का भविष्य संकट में न पड़ता। छात्रों ने मांग की है कि शीघ्र स्पष्ट निर्देश जारी कर परीक्षा में सम्मिलित होने का अवसर सुनिश्चित किया जाए।
शिक्षा जगत से जुड़े लोगों का कहना है कि लगातार सामने आ रही अनियमितताओं से जनपद की शैक्षणिक छवि प्रभावित हो रही है। यदि प्रशासनिक स्तर पर जवाबदेही तय नहीं की गई तो ऐसे प्रकरण दोहराए जाते रहेंगे।
फिलहाल सभी की निगाहें विभागीय अधिकारियों की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। छात्र और अभिभावक उम्मीद लगाए बैठे हैं कि बोर्ड और जिला प्रशासन शीघ्र हस्तक्षेप कर 700 विद्यार्थियों के भविष्य को सुरक्षित करेंगे।