कुशीनगर : “छितौनी में प्रशासन कुंभकर्णी नींद में! पीड़ित अम्बिका कुशवाहा चार दिन से आमरण अनशन पर, फिर भी नहीं पहुंचे अधिकारी”।
धनंजय कुमार पाण्डेय, व्यूरो चीफ, उत्तर प्रदेश
🔴 चार दिन से आमरण अनशन – छितौनी प्रशासन का एक भी अधिकारी हाल जानने नहीं पहुँचा!
🔵 पुश्तैनी ज़मीन पर अवैध कब्जा — FIR नहीं, कार्रवाई नहीं…, पुलिस की खामोशी पर उठ रहे बड़े सवाल!
🟠 दीवार टूटी, ज़मीन कब्जाई — लेकिन जिला प्रशासन मौन! पीड़ित की पुकार हवा में!

🟣 ‘प्रभावशाली’ आरोपियों के आगे बेबस सिस्टम — न्याय के लिए अम्बिका कुशवाहा का आमरण अनशन चौथे दिन भी जारी!
🟢 छितौनी में कानून व्यवस्था लाचार—शिकायतें फाइलों में दबी, पीड़ित आज पांचवे दिन आमरण अनसन पर!
छितौनी / कुशीनगर 12 दिसम्बर
“घड़ारी की पुश्तैनी भूमि पर दबंगों का कब्जा—दीवार तोड़ी, धमकाया; थाना, तहसील से लेकर जिले तक दौड़े पीड़ित, पर कार्रवाई शून्य”
छितौनी : जनपद कुशीनगर में प्रशासनिक तंत्र की लापरवाही का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहाँ वार्ड नं. 13 सुबाष नगर, नगर पंचायत छितौनी के निवासी अम्बिका कुशवाहा पुत्र राधाकिशुन अपनी जमीन पर जबरन कब्जे और पुलिस प्रशासन की उदासीनता के खिलाफ पिछले चार दिनों से आमरण अनशन पर बैठे हैं, लेकिन जिला प्रशासन का कोई जिम्मेदार अधिकारी अभी तक उनके हालात जानने तक नहीं पहुंचा।
पीड़ित का कहना है कि उनकी पुश्तैनी घड़ारी की भूमि का बंटवारा करीब 6 वर्ष पूर्व उनके और उनके भाई के बीच सहमति से हो चुका था। बंटवारे के बाद उन्होंने अपने हिस्से में 6 फुट ऊँची और 20 फुट लंबी पक्की दीवार भी बनवाई थी। लेकिन 20 नवंबर 2025 को जब वह परिवार सहित रिश्तेदारी में पूजा के कार्यक्रम से लौटे, तब उन्हें पता चला कि उनके पटीदार—**जवाहिर पुत्र राधाकिशुन, तथा राकेश व भोला पुत्रगण जवाहिर—ने उनकी अनुपस्थिति में दीवार तोड़ दी और उनके हिस्से की करीब 2 फुट ज़मीन पर जबरन कब्जा कर नई दीवार खड़ी करने लगे।
पीड़ित द्वारा जब इसका विरोध किया गया तो विपक्षीगण कथित रूप से गोलबंद होकर मारपीट पर उतारू हो गए। अम्बिका कुशवाहा ने मामले की शिकायत 22 नवंबर को थाना दिवस के दौरान हनुमानगंज थाने में दी, लेकिन आरोप है कि विपक्षी “काफी प्रभावशाली और दबंग” होने के कारण पुलिस ने आज तक कोई कार्रवाई नहीं की।
प्रशासनिक चक्रव्यूह से थक चुके नागरिक अम्बिका कुशवाहा ने इसकी लिखित सूचना जिलाधिकारी कुशीनगर, पुलिस अधीक्षक कुशीनगर और उप जिलाधिकारी खड्डा को दी और उसके बाद 8 दिसंबर 2025 से अपने घर स्थित काली मंदिर परिसर में आमरण अनशन शुरू कर दिया।
लेकिन हैरानी की बात यह है कि चार दिनों बाद भी DM-SP कार्यालय से एक भी सक्षम अधिकारी उन्हें सुनने नहीं पहुंचा। स्वास्थ्य विभाग की एक टीम रुटीन जांच के लिए अवश्य पहुंची, लेकिन समस्या का समाधान करने की जिम्मेदारी रखने वाले अधिकारी अब तक नदारद हैं।
स्थानीय लोगों में भी प्रशासन की इस उदासीनता को लेकर आक्रोश पनप रहा है। लोगों का कहना है कि जमीन विवादों में पुलिस की निष्क्रियता और प्रभावशाली पक्षों के सामने झुकाव जैसी प्रवृत्ति आम नागरिकों को न्याय के लिए सड़क पर उतरने को मजबूर कर रही है।
अम्बिका कुशवाहा का कहना है कि—
“जब तक जिला प्रशासन ठोस कार्रवाई नहीं करता, मैं आमरण अनशन नहीं तोड़ूँगा। अगर मुझे कुछ होता है तो इसकी पूरी जिम्मेदारी पुलिस और प्रशासन की होगी।”
अब देखने वाली बात यह है कि पीड़ित की जान जोखिम में होने के बावजूद क्या जिला प्रशासन अपनी नींद से जागेगा या फिर अनशन स्थल से ही किसी बड़ी घटना की प्रतीक्षा करेगा?