बिहार में गुंडाराज खतरनाक स्टेज पर, पहले ICU में गैंगस्टर की हत्या, अब एंबुलेंस में लड़की से गैंगरेप।
ब्यूरो रिपोर्ट, आपकी आवाज़ न्यूज, बिहार
1. ICU में मौत का गेम! इलाज के नाम पर अस्पताल पहुंचा गैंगस्टर, बंदूकधारियों ने उतारा मौत के घाट!
2. सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल! बिहार के अस्पताल में ICU में घुसकर गैंगस्टर की दिनदहाड़े हत्या, पुलिस मूकदर्शक?

3. बीमार नहीं, इंसानियत मरी!
बिहार में एम्बुलेंस को बनाया गैंगरेप का अड्डा।
4. एम्बुलेंस बनी दरिंदगी का वाहन!
पीड़िता की चीखें भी न रोक सकीं दरिंदों की हैवानियत।
5. सरकारी वाहन, अपराधियों का हथियार!
इलाज के नाम पर गैंगरेप, बिहार की सड़कों पर दहशत।
6. बिहार में कहां है कानून? एम्बुलेंस में गैंगरेप ने सुरक्षा व्यवस्था पर खड़े किए गंभीर सवाल।

बिहार में बिगड़ती क़ानून व्यवस्था का जिम्मेदार कौन?
बिहार :- चाणक्य ने कहा है कि जिस राज्य का राजा भ्रष्ट, निकम्मा और चरित्रहीन हो जाए, उस राज्य का हाल नर्क से भी बदतर हो जाता है। वहां की जनता बेमौत मारी जाती है, बेटियों की इज्जत दिनदहाड़े लूटी जाती है और लोग घुट–घुट कर जीने को मजबूर हो जाते हैं! बिहार इसका जीता– जागता उदाहरण है।
एक सप्ताह पहले की बात है जब पटना के पारस हॉस्पिटल में घुसकर गैंगेस्टर चंदन मिश्रा को गोलियों से भून दिया जाता है और बदमाश बेखौफ होकर बिल्कुल आराम से वहां से निकल भी जाते हैं।
अब गया में होमगार्ड भर्ती में शामिल होने आई लड़की के बेहोश होने के बाद उसे हॉस्पिटल ले जाते वक्त टैक्नीशियन और ड्राइवर ने एम्बुलेंस में उसके साथ बारी–बारी से उसकी इज्जत लूटी।
ये NDA का राक्षसराज है, जहां न इंसान की जान सुरक्षित है, न ही बहन–बेटियों की आबरू…
यहां अपराधियों और कुकर्मियों को कानून का नहीं बल्कि कानून को इन जैसे दरिंदों का डर है। ये छुट्टा सांड़ हो चुके हैं और जनता डर के साये में जीने को विवश। कुछ दिन से तो ऐसा लगने लगा है कि बिहार तालिबानियों का अफगानिस्तान बन चुका है। यहां कानून नहीं बल्कि माफियाओं और गुंडो की सरकार है।
सिर्फ 20 दिन के भीतर बिहार में 65 से अधिक हत्याएं हो चुकी हैं। लूट, बलात्कार और अपहरण की घटनाओं की तो गिनती ही मत पूछिए…
जिन पुलिस अधिकारियों पर बेटियों की इज्जत और जनता की सुरक्षा की जिम्मेदारी है, वो बेहद बेशर्मी से कैमरे पर कह देते हैं कि अप्रैल-जून में हत्याएं होती रहती हैं। क्योंकि किसानों के पास काम नहीं होता।
बिहार की बेबस बेटियां और बेकसूर जनता आखिर किससे करे सुरक्षा की उम्मीद? बेशर्म पुलिस से या नाकारा सरकार से…
एक रिपोर्ट के मुताबिक, बीते कुछ दिनों से नीतीश बाबू की कृपा से बिहार में हर महीने लूट, हत्या, अपहरण और बलात्कार के करीब 11 हजार नए मामले आ रहे हैं। हैरानी की बात ये है कि, अकेले पटना में इस साल 116 हत्या, 41 बलात्कार के मामले हुए हैं तो सोचिए पूरे बिहार का क्या हाल होगा… नीतीशराज के 17 वर्षों में 53,150 हत्याएं दर्ज हुई।
इसके अलावा महिलाओं-बच्चियों के साथ होने वाले घिनौने अपराध बहुत तेजी से बढ़ रहे हैं। गुंडो के गिरोहों द्वारा जनता में अपना डर पैदा करने के लिए दिनदहाड़े गैंगवार को अंजाम दिया जा रहा है।
20 दिन पहले पूर्णिया में एक महिला को डायन बताकर उसे और उसके परिवार के 6 लोगों को जिंदा जलाकर मार डाला गया।
आपको याद होगा… बेखौफ अपराधियों ने पटना में कारोबारी गोपाल खेमका को उनके घर के पास मार डाला था। आपको ये भी याद होगा कि दिनदहाड़े आरा के तनिष्क शोरूम से 25 करोड़ के हीरे-सोने के गहने लूट लिए गए। शोरूम के कर्मचारी पुलिस को फोन करते रहे, मगर बचाना तो छोड़िए पुलिस ने घंटों तक फोन ही नहीं उठाया।
पिछले साल नवादा जिले में दबंगों ने सैकड़ों महादलितों के घर फूंक दिए थे। दबंगों ने खुलेआम दिन-दहाड़े सैकड़ों राउंड गोलियां चलाकर गरीब महादलितों को मारा-पीटा था। आज महीनों बीतने के बाद भी किसी पीड़ित को न्याय नहीं मिल पाया है।
आज बिहार में न जनता सुरक्षित है, न महिलाओं-बेटियों की इज्जत सुरक्षित हैं, न ही व्यापारियों का धंधा- बिजनेस। बिहार की जनता को खुद नहीं पता कि कब उसके साथ कौन सी घटना हो जाए…बीते 10 सालों में नीतीश ने बिहार को यही सौगात दिया है।
अब ये बिहारियों को तय करना है कि इस गुंडाराज को जड़ से खत्म करना है या इसी गुंडाराज में अपनी जान और बहन–बेटियों की इज़्ज़त लुटाकर जीने की आदत डालना है।
नितिश कुमार गुप्ता
प्रदेश अध्यक्ष
उत्तर प्रदेश राजीव गांधी विचार मंच