कुशीनगर में फर्जीवाड़े का खुलासा: एक ही डॉक्टर के नाम पर संचालित हो रहे थे दो-दो निजी अस्पताल, मंडलीय टीम की बड़ी कार्रवाई।

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धनंजय कुमार पाण्डेय, व्यूरो चीफ, उत्तर प्रदेश

∆ एक दर्जन निजी अस्पतालों की औचक जांच, कई जगह गंभीर अनियमितताएं उजागर!

∆ आधा दर्जन अस्पतालों में एक ही डॉक्टर का नाम दो स्थानों पर दर्ज!

∆ कुशीनगर जिले के स्वास्थ्य महकमे में योगी सरकार के जीरो टॉलरेंस नीति की जम कर उड़ाई जा रही धज्जियां।

∆ कसया क्षेत्र में बिना डॉक्टर के संचालित मिलें अस्पताल!

∆ घायल बच्ची को टीम ने तत्काल मेडिकल कॉलेज भिजवाया!

∆ तीन दिन में दस्तावेज प्रस्तुत करने का निर्देश, कार्रवाई के संकेत।

कुशीनगर। जिले में निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली को लेकर उठ रहे सवालों के बीच शुक्रवार को स्वास्थ्य विभाग की मंडलीय टीम ने बड़ी कार्रवाई की। उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य विभाग के निर्देश पर संयुक्त निदेशक स्वास्थ्य गोरखपुर के नेतृत्व में गठित टीम ने स्थानीय अधिकारियों के साथ मिलकर जनपद के चिह्नित लगभग एक दर्जन निजी अस्पतालों की औचक जांच की।
जांच के दौरान कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। आधा दर्जन से अधिक अस्पतालों में एक ही डॉक्टर का नाम दो अलग-अलग स्थानों पर दर्ज पाया गया। कसया क्षेत्र में तो एक ही चिकित्सक के नाम से दो निजी अस्पताल संचालित होते मिले। एक स्थान पर चिकित्सक स्वयं मौजूद थे और उन्होंने निजी अस्पताल में मरीज देखने की बात स्वीकार की।
इसके अतिरिक्त मेडिकल कॉलेज पडरौना के एक चिकित्सक के नाम से भी निजी अस्पताल संचालित होने की जानकारी सामने आई। कसया स्थित एक अन्य अस्पताल में भी उनका नाम दर्ज पाया गया, जिसकी पुष्टि जांच के दौरान हुई।
जांच के क्रम में कसया के एक निजी अस्पताल में गंभीर रूप से घायल एक बच्ची उपचार की प्रतीक्षा में मिली। चिकित्सक के अनुपस्थित होने पर टीम ने तत्काल एंबुलेंस की व्यवस्था कर उसे मेडिकल कॉलेज पडरौना भिजवाया।
कसया में चार निजी अस्पताल ऐसे पाए गए, जहां निरीक्षण के समय कोई डॉक्टर उपस्थित नहीं था। वहीं पडरौना और रामकोला क्षेत्र के कुछ अस्पतालों में व्यवस्थाएं संतोषजनक पाई गईं, लेकिन अधिकांश स्थानों पर दस्तावेजी व प्रशासनिक कमियां उजागर हुईं।
स्वास्थ्य विभाग ने संबंधित अस्पताल संचालकों को नोटिस जारी कर तीन दिन के भीतर आवश्यक अभिलेखों सहित अपर निदेशक स्वास्थ्य कार्यालय में उपस्थित होने का निर्देश दिया है। जांच टीम में संयुक्त निदेशक स्वास्थ्य गोरखपुर डॉ. अरुण गर्ग, मंडलीय सर्विलांस अधिकारी डॉ. वी.के. श्रीवास्तव तथा कसया सीएचसी अधीक्षक डॉ. मारकंडेय चतुर्वेदी शामिल रहे।
रिपोर्ट मुख्य चिकित्साधिकारी को सौंपे जाने के बाद संबंधित अस्पतालों के विरुद्ध प्रशासनिक कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।

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