कुशीनगर/पडरौना की होनहार बेटी डॉ. अंजलि सिंह को मिली पीएचडी की उपाधि, परिवार में खुशी की लहर।
धनंजय कुमार पाण्डेय, ब्यूरो चीफ, उत्तर प्रदेश
✓ गर्व की बात! नारी शक्ति का प्रतीक बनी पडरौना नगर की डॉ.अंजलि सिंह ने रचा इतिहास, शिक्षा के क्षेत्र में नया कीर्तिमान।
✓ संघर्ष से सफलता तक का सफर, डॉ. अंजलि सिंह ने दिखाया बेटियों के हौसले को नया मुकाम।
✓ पीएचडी की उपाधि से नवाजी गईं डॉ. अंजलि सिंह
पडरौना के लिए गौरव का क्षण, शिक्षा प्रेमियों में हर्ष।
✓ “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” की सच्ची मिसाल बनीं डॉ.
अंजलि सिंह ने जिले का नाम किया रोशन।
पडरौना की बेटी अंजलि सिंह को मिला PhD की उपाधि, जिले का नाम किया रोशन।
पडरौना की प्रतिभाशाली बेटी अंजलि सिंह ने शिक्षा के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए डॉक्टरेट (PhD) की उपाधि प्राप्त की है। उनकी इस सफलता पर पूरे जनपद में खुशी की लहर दौड़ गई है। शिक्षा, समाज और प्रशासनिक हलकों से उन्हें बधाइयों का तांता लगा हुआ है।
डॉ. अंजलि सिंह ने पण्डित दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय से शोध कार्य पूरा कर यह उपाधि प्राप्त की। उनका शोध विषय वनस्पति विज्ञान काला नमक चावल रहा, जिसे शिक्षाविदों ने सराहा और मूल्यवान बताया। अंजलि की यह सफलता ग्रामीण और साधनहीन क्षेत्रों से आने वाली बेटियों के लिए प्रेरणा है।
डॉ. अंजलि ने अपनी शुरुआती पढ़ाई, किडीज कॉर्नर स्कूल, एवं हनुमान इण्टर कॉलेज पडरौना के से की और लगातार कठिन परिश्रम के बल पर इस मुकाम तक पहुँचीं। उन्होंने कहा कि, “यह उपलब्धि सिर्फ मेरी नहीं, बल्कि हर उस बेटी की है जो बड़े सपने देखती है। मेरे माता-पिता, गुरुजन और मित्रों का साथ मेरे लिए संबल बना।”
अंजलि की इस कामयाबी पर जनपदवासियों ने हर्ष जताया है। स्थानीय नेताओं, समाजसेवियों और शिक्षकों ने उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।
जल्द ही जिला प्रशासन की ओर से उन्हें सम्मानित किए जाने की संभावना भी जताई जा रही है।
यह सफलता ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ जैसे अभियानों को धरातल पर सार्थक बनाती है।
डॉ.अंजलि सिंह ने अपनी पीएचडी शोध कार्य में गहन अध्ययन किया, जिसे विश्वविद्यालय के प्राध्यापकों द्वारा सराहा गया। अंजलि की यह सफलता न केवल उनके परिवार के लिए गौरव की बात है, बल्कि पूरे पडरौना और कुशीनगर जिले के लिए भी प्रेरणास्पद है।
उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा के बाद कठिन संघर्ष और समर्पण के बल पर आज वह उस मुकाम पर हैं जहां से वह अन्य बेटियों को भी प्रेरित कर रही हैं।
इस अवसर पर अंजलि सिंह ने कहा, “यह उपाधि मेरे माता-पिता, गुरुजनों और समाज के सहयोग से संभव हो पाया है, और मैं चाहती हूं कि गांव-देहात की हर बेटी शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़े और अपने सपनों को पूरा करे।”
यह उपलब्धि यह सिद्ध करती है कि संसाधन सीमित हो सकते हैं, लेकिन अगर संकल्प मजबूत हो तो कोई भी मंज़िल दूर नहीं होती।