कुशीनगर में गरजा प्रधानाचार्य परिषद का जनपदीय सम्मेलन, बोर्ड परीक्षा बहिष्कार तक का ऐलान।

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धनंजय कुमार पाण्डेय, व्यूरो चीफ, उत्तर प्रदेश

∆ “सरकार नहीं मानी तो बोर्ड परीक्षा का बहिष्कार तय” – डॉ. मणि शंकर तिवारी

∆ “प्रधानाचार्यों पर परीक्षा क्यों, सचिवालय में क्यों नहीं?” – ध्रुव कुमार त्रिपाठी

∆ “माध्यमिक शिक्षा प्रयोगवाद की शिकार, अधिनियम को किया जा रहा दरकिनार”

∆ “28 हजार विद्यालय, फिर भी चयन वेतनमान में खुली वसूली का आरोप”

∆ बोर्ड परीक्षा बहिष्कार का निर्णय ले सकता है उत्तर प्रदेश प्रधानाचार्य परिषद : प्रदेश अध्यक्ष मणि शंकर त्रिपाठी

कुशीनगर। 21 जनवरी 26
उत्तर प्रदेश प्रधानाचार्य परिषद, कुशीनगर का जनपदीय सम्मेलन आज राजकीय बौद्ध संग्रहालय, कुशीनगर के सभागार में गरिमामय एवं संघर्षशील वातावरण में सम्पन्न हुआ। सम्मेलन की अध्यक्षता परिषद के प्रांतीय अध्यक्ष डॉ. मणि शंकर तिवारी ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में शिक्षक विधायक माननीय ध्रुव कुमार त्रिपाठी की उपस्थिति ने कार्यक्रम को विशेष गरिमा प्रदान की।
सम्मेलन का विषय प्रवर्तन परिषद के प्रांतीय संरक्षक डॉ. टी. पी. सिंह ने किया। इस अवसर पर साहित्यिक प्रकोष्ठ के अध्यक्ष डॉ. राम जन्म सिंह, रमेश सिंह, प्रांतीय कार्यकारी अध्यक्ष देव भास्कर तिवारी, साहित्यिक प्रकोष्ठ के संयोजक डॉ. दिनेश मणि त्रिपाठी सहित अनेक प्रांतीय व जनपदीय पदाधिकारी मंचासीन रहे।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रांतीय अध्यक्ष डॉ. मणि शंकर तिवारी ने दो टूक शब्दों में कहा कि “बोर्ड परीक्षा से पहले परिषद की बैठक होगी और यदि सरकार ने प्रधानाचार्यों की जायज मांगों पर ध्यान नहीं दिया तो परीक्षा बहिष्कार जैसा कठोर निर्णय लेने से भी परिषद पीछे नहीं हटेगी।” उनके इस वक्तव्य से सभागार तालियों से गूंज उठा।
विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित नगर पालिका परिषद कसया के अध्यक्ष प्रतिनिधि श्री राकेश जायसवाल ने कहा कि इतने विद्वान, अनुभवी और शिक्षाविद प्रधानाचार्यों के बीच उपस्थित होना उनके लिए सौभाग्य की बात है और परिषद का जो भी आदेश होगा, उसका पालन करने का वे हरसंभव प्रयास करेंगे।
परिषद के प्रांतीय महामंत्री श्री शैलेन्द्र दत्त शुक्ल ने माध्यमिक शिक्षा की वर्तमान स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि “आज माध्यमिक शिक्षा प्रयोगवाद से ग्रस्त हो चुकी है। माध्यमिक शिक्षा अधिनियम को दरकिनार कर कार्य किया जा रहा है। ऐसे अंधकारमय समय में प्रधानाचार्य परिषद ने संघर्ष का बीड़ा उठाया है और अंततः शिक्षा की दिशा वही तय करेंगे जो अधिनियम और शिक्षाविद् सोच के अनुरूप कार्य करेंगे।”
मुख्य अतिथि माननीय ध्रुव कुमार त्रिपाठी ने अपने ओजस्वी संबोधन में कहा कि माध्यमिक शिक्षा में अनेक विसंगतियाँ व्याप्त हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि “जब सचिवालय में चरणबद्ध पदोन्नति के लिए कोई परीक्षा नहीं है तो प्रधानाचार्यों पर परीक्षा क्यों थोपी जा रही है?”

उन्होंने यूपी बोर्ड को एशिया का सबसे बड़ा बोर्ड बताते हुए कहा कि शासन-प्रशासन के कुछ लोग इसे कमजोर करने का कार्य कर रहे हैं। उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि “28 हजार विद्यालयों के बावजूद शायद ही कोई ऐसा जिला विद्यालय निरीक्षक हो, जहां चयन वेतनमान में धन की मांग न होती हो।”
उन्होंने यह भी कहा कि हाईस्कूल के प्रधानाचार्यों को प्रोन्नत वेतनमान नहीं दिया जा रहा, जो स्पष्ट रूप से अन्याय है। तदर्थ प्रधानाचार्यों के विनियमितिकरण पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि इसमें सरकार का कोई वित्तीय भार नहीं है, फिर भी हठधर्मिता के कारण यह कार्य लंबित है। उन्होंने ऐलान किया कि यदि परिषद परीक्षा बहिष्कार का निर्णय लेती है तो वे स्वयं आंदोलन में एक कदम आगे चलेंगे।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता श्री श्रीनिवास शुक्ल ने संगठन की ऐतिहासिक यात्रा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश प्रधानाचार्य परिषद ने अनेक संघर्षों के बाद यह मुकाम हासिल किया है। उन्होंने प्रधानाचार्यों से एकजुटता और संकल्प बनाए रखने का आह्वान किया।
सम्मेलन में कुशीनगर के कार्यकारी जिलाध्यक्ष अश्विनी कुमार पाण्डेय, संरक्षक गोरख राय, रियल पैराडाइज एकेडमी पडरौना की प्रधानाचार्या डॉ.सुनीता पाण्डेय, श्रीमती अनीता सिंह, जेपी वर्मा, श्रीराम प्रसाद, पूजा जायसवाल, पूजा चौधरी, देवरिया के जिलाध्यक्ष डॉ. माधव सिंह, महराजगंज के जिलाध्यक्ष विजय प्रताप सिंह, गोरखपुर के जिलाध्यक्ष डॉ. अजय कुमार पांडेय, गिरिजेश पांडेय, गिरिजेश तिवारी, उमेश उपाध्याय सहित जनपद कुशीनगर के समस्त प्रधानाचार्यगण बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
सम्मेलन के अंत में संगठनात्मक एकता, शिक्षा अधिनियम की रक्षा एवं माध्यमिक शिक्षा के हित में निरंतर संघर्ष का संकल्प लिया गया। कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।
अतिथियों का स्वागत एवं कार्यक्रम का कुशल संचालन जिलाध्यक्ष डॉ. देवेंद्र मणि त्रिपाठी द्वारा किया गया।

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