बड़ी खबर/ नेबुआ नौरंगिया विकास खण्ड में भ्रष्टाचार की बेशर्म कहानी: बभनौली ग्राम पंचायत में पशु शेड योजना बनी “लूट की योजना”।
धनंजय कुमार पाण्डेय, व्युरो चीफ, उतर प्रदेश
∆ ग्राम प्रधान ने गरीब का भरोसा तोड़ा, दो साल बाद भी नहीं लौटाया पशु शेड का पैसा!
∆ शिकायत के बाद भी चुप्पी – बीडीओ और ब्लॉक कर्मचारी कर रहे हैं भ्रष्टाचार की पैरवी?
∆ ग्राम पंचायत बभनौली में योगी सरकार के जीरो टॉलरेंस नीति की जमकर उडाई जा रही धज्जियां।
∆ फाइलें दबी, आवाज़ें थमीं — बभनौली पंचायत में न्याय के नाम पर चल रहा भ्रष्टाचार का घिनौना खेल!
∆ वर्ष 2021 से 23 फिर वर्ष 2023 से 25 तक लाभार्थी करता रहा इंतज़ार, और अधिकारी बने तमाशबीन!
∆ सरकारी योजना के नाम पर लूट – बभनौली पंचायत में पशु सेड धन बंदरबांट का खुला खेल!
∆ ब्लॉक से जिले तक की निष्क्रियता पर सवाल – क्या मिलीभगत से दबाया जा रहा है मामला?

नेबुआ नौरंगिया कुशीनगर 25 अक्टुबर 2025 कुशीनगर जनपद के विकास खंड नेबुआ नौरंगिया के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत बभनौली में भ्रष्टाचार का एक शर्मनाक मामला सामने आया है। यह मामला सरकार की पशु शेड निर्माण योजना से जुड़ा हुआ है, जिसका उद्देश्य ग्रामीणों को पशुओं के लिए सुरक्षित आश्रय उपलब्ध कराना था — लेकिन जमीनी स्तर पर यह योजना “घोटाले का अड्डा” बनकर रह गई है।
∆ ग्राम पंचायत बभनौली में भ्रष्टाचार का बड़ा खेल – गरीब लाभार्थी के हक का ₹1.25 लाख हजम कर गए प्रधान और तंत्र!
जनपद के विकास खंड नेबुआ नौरंगिया के ग्राम पंचायत बभनौली में सरकार की महत्वाकांक्षी “पशु शेड निर्माण योजना” अब “भ्रष्टाचार की मिसाल” बन गई है।
गांव के एक लाभार्थी ने ग्राम प्रधान पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि, उसका पशु शेड बनवाने का ₹1 लाख 25 हज़ार से अधिक भुगतान शासन से आ जाने के बावजूद, उसे आज तक नहीं दिया गया।
दस्तावेज़ों से यह स्पष्ट है कि पशु शेड योजना के अंतर्गत प्राप्त धनराशि का भुगतान दो फर्मों “आस्था ईंट उधोग” व “श्री बालाजी बिल्डिंग मटेरियल एंड हॉर्डवेयर” में पहुंच चुका है। फिर भी ग्राम प्रधान ने न तो लाभार्थी को उसका पैसा दिया, न कोई स्पष्ट जवाब।


∆ क्या है पुरा मामला?
ग्राम पंचायत बभनौली के एक लाभार्थी ने आरोप लगाया है कि वर्ष 2021-22 में उसका नाम पशु शेड निर्माण की लाभार्थी सूची में शामिल किया गया था। लाभार्थी के अनुसार, ग्राम प्रधान ने उससे कहा कि फिलहाल शासन से धन नहीं आया है, आप अपने पैसे से शेड बना लीजिए, जैसे ही फंड आएगा, भुगतान कर दिया जाएगा। लाभार्थी, जो प्रधान का करीबी था, ने भरोसा करते हुए अपनी मेहनत की कमाई लगाकर शेड का निर्माण करवा दिया।
लेकिन जब वर्ष 2023 में फंड ग्राम पंचायत के खाते में आया, तो ग्राम प्रधान का रवैया पूरी तरह बदल गया। बार-बार अनुरोध करने के बावजूद प्रधान ने न तो पैसा लौटाया, न कोई जवाब दिया।
∆ दो साल बाद भी नहीं मिला भुगतान!
करीब दो वर्षों के इंतज़ार के बाद भी जब प्रधान ने भुगतान नहीं किया, तो पीड़ित लाभार्थी ने इसकी शिकायत खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) से लेकर जिलाधिकारी कुशीनगर तक की।
परंतु, शिकायत करने के कई महीने बीत जाने के बाद भी न तो जांच हुई, न कोई कार्रवाई। इससे लाभार्थी आज गंभीर आर्थिक तंगी से गुजर रहा है।
∆ सिस्टम की सुस्ती या मिलीभगत?
इस प्रकरण ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि जब मामला अधिकारियों के संज्ञान में है, तो अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई? क्या बीडीओ कार्यालय में फाइल दबाकर “सेटलमेंट” की कोशिश की जा रही है?
स्थानीय लोगों का कहना है कि ग्राम पंचायत बभनौली में विकास कार्यों में पारदर्शिता का अभाव है। कई योजनाओं के नाम पर केवल कागजों पर कार्य दिखाया गया है, जबकि हकीकत में कुछ नहीं हुआ।
∆ जनता का सवाल – जवाब कब मिलेगा?
ग्रामवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि बभनौली पंचायत के सभी पशु शेड निर्माणों की जांच कराई जाए, और दोषी ग्राम प्रधान व संबंधित सचिव के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि जब गरीब अपने खून-पसीने की कमाई से सरकारी योजनाओं में हिस्सा लेता है और फिर ठगा जाता है, तो यह केवल भ्रष्टाचार नहीं बल्कि गांव के विकास पर सीधा हमला है।
∆ प्रशासन की चुप्पी पर उठ रहे सवाल!
जिला प्रशासन की लंबे समय से जारी चुप्पी इस बात की गवाही दे रही है कि कहीं न कहीं अधिकारी भी इस “शेड घोटाले” को लेकर असहज स्थिति में हैं।
यदि समय रहते इस मामले की निष्पक्ष जांच नहीं हुई, तो यह कुशीनगर जिले में पंचायत स्तर पर व्याप्त भ्रष्टाचार के नेटवर्क की एक और मिसाल बन जाएगा।
बभनौली पंचायत का यह मामला सिर्फ एक लाभार्थी का नहीं, बल्कि उस व्यवस्था का आईना है जहाँ गांवों की योजनाएं भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ती जा रही हैं। अब देखना यह है कि जिलाधिकारी कुशीनगर और बीडीओ नेबुआ नौरंगिया इस मामले में कब तक मौन रहते हैं — या फिर जनता को न्याय दिलाने की दिशा में कोई ठोस कदम उठाते हैं।