कुशीनगर : रामकोला के मां गीतांजलि हॉस्पिटल पर बड़ी कार्रवाई – प्रसूता की मौत के बाद जांच रिपोर्ट में खुली लापरवाही, अस्पताल का पंजीकरण निरस्त।

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धनंजय कुमार पाण्डेय, व्यूरो चीफ, उत्तर प्रदेश

1️⃣ प्रसूता की मौत पर बड़ा एक्शन—जांच रिपोर्ट में अस्पताल की लापरवाही बेनकाब!

2️⃣ रामकोला का मां गीतांजलि हॉस्पिटल सील! पंजीकरण निरस्त, पूरे स्टाफ पर गिरी गाज!

3️⃣ डॉक्टरों की चूक से गई जान! जांच रिपोर्ट ने खोली अस्पताल की पोल!

4️⃣ जांच समिति की कड़ी अनुशंसा—दोषियों पर क्लीनिकल एक्ट के तहत हो कड़ी कार्रवाई!

5️⃣ इलाज में मानक प्रोटोकॉल की अनदेखी—मां गीतांजलि हॉस्पिटल सवालों के घेरे में!

रामकोला/कुशीनगर।
बीते दिनों प्रसूता पूनम देवी की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मृत्यु ने आखिरकार स्वास्थ्य विभाग को कड़ा कदम उठाने पर मजबूर कर दिया। मां गीतांजलि हॉस्पिटल, रामकोला में इलाज के दौरान हुई इस दर्दनाक घटना की विस्तृत जांच रिपोर्ट को मुख्य चिकित्साधिकारी ने जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर को सौंप दी।
जिलाधिकारी के निर्देश पर गठित तीन सदस्यीय संयुक्त जांच समिति—
डा.अवधेश प्रसाद, उप जिला प्रतिरक्षण अधिकारी
डा.शेष कुमार विश्वकर्मा, प्रभारी चिकित्सा अधिकारी, सीएचसी रामकोला
डा.आनन्द प्रकाश गुप्ता, बाल रोग विशेषज्ञ, सीएचसी रामकोला ने 28 नवंबर 2025 को अपनी जांच आख्या प्रस्तुत करते हुए अस्पताल प्रबंधन व चिकित्सकीय टीम की गंभीर लापरवाही को पुष्टि सहित दर्ज किया।
जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य उजागर!

समिति की रिपोर्ट के अनुसार—
√ अस्पताल में प्रसूता के उपचार के दौरान मानक प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया गया।
√ समय रहते विशेषज्ञ चिकित्सक को बुलाने में गंभीर चूक की गई।
√ आवश्यक उपकरण व संसाधनों की उपलब्धता पर भी सवाल उठे।
√ मरीज की स्थिति बिगड़ने के बावजूद समुचित रेफरल व्यवस्था नहीं की गई।

अस्पताल संचालक अरविन्द कुमार शर्मा, इंचार्ज डॉ.मीरा शर्मा, सर्जन डॉ.विकास मंडलोई और आशा कार्यकर्ता मजहरून्निशा को लापरवाही का प्रत्यक्ष दोषी पाया गया।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि अस्पताल में भर्ती, उपचार और रिकॉर्ड संधारण की प्रक्रिया में गंभीर विसंगतियां पाई गईं, जो क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट–2010 का स्पष्ट उल्लंघन है।

√ अस्पताल का पंजीकरण निरस्त—सख्त कार्रवाई की तैयारी!

समिति ने जिलाधिकारी को यह संस्तुति दी है कि, जिला रजिस्ट्रीकरण प्राधिकरण की अनुमति के उपरांत मां गीतांजलि हॉस्पिटल का पंजीकरण तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाना चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी दर्दनाक घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।

साथ ही, संबंधित चिकित्सकों व जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट–2010 के तहत कठोर दंडात्मक कार्रवाई की भी अनुशंसा की गई है।

√ परिजनों में आक्रोश, प्रशासन सतर्क!

घटना के बाद मृतका के परिवार और क्षेत्रवासियों में भारी रोष व्याप्त है। प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा और पूरे मामले की कार्रवाई पारदर्शिता के साथ की जाएगी।

इस बड़ी कार्रवाई के बाद जिले के निजी अस्पतालों में भी चिंता और सतर्कता की लहर दौड़ गई है। यह कदम स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही पर लगाम लगाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण संदेश माना जा रहा है।

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