प्रयागराज : माघ मेला के शुभारंभ पर आस्था का महासंगम, पौष पूर्णिमा पर श्रद्धालुओं ने लगाई पुण्य की डुबकी

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डेस्क, आपकी आवाज़ न्यूज़, उत्तर प्रदेश

∆ पौष पूर्णिमा से माघ मेला का शुभारंभ, श्रद्धालुओं ने लगाया संगम में आस्था की पहली डुबकी!

∆ त्रिवेणी संगम पर उमड़ा श्रद्धा का सैलाब, साधु-संतों और अखाड़ों का भव्य स्वागत!

∆ हर-हर गंगे के जयघोष से गूंजा प्रयागराज, लाखों श्रद्धालुओं ने किया पुण्य स्नान!

∆ माँ गंगा–यमुना–सरस्वती से सुख-समृद्धि की कामना, माघ मेला बना आस्था का महापर्व!

प्रयागराज/उत्तर प्रदेश 04 जनवरी 2026
तीर्थराज प्रयाग में माघ मेला का शुभारंभ पावन पौष पूर्णिमा के साथ श्रद्धा, भक्ति और आस्था के वातावरण में हुआ। इस अवसर पर संगम तट पर हर-हर गंगे और जय तीर्थराज प्रयाग के उद्घोष गूंजते रहे। देश-प्रदेश से आए लाखों श्रद्धालुओं ने पवित्र त्रिवेणी संगम में आस्था की डुबकी लगाकर पुण्य लाभ अर्जित किया।
माघ मेला के शुभारंभ पर श्रद्धालुओं, प्रदेशवासियों एवं देशभर से पधारे भक्तों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी गईं। इस पावन अवसर पर तीर्थराज प्रयाग में पहुंचे पूज्य साधु-संतों, धर्माचार्यों, विभिन्न अखाड़ों के महामंडलेश्वरों, संत-महात्माओं तथा कल्पवासियों का भव्य स्वागत एवं अभिनंदन किया गया। अखाड़ों के संतों की उपस्थिति से मेला क्षेत्र में आध्यात्मिक ऊर्जा का विशेष संचार देखने को मिला।

पौष पूर्णिमा स्नान को माघ मेले का पहला और अत्यंत महत्वपूर्ण स्नान पर्व माना जाता है। तड़के भोर से ही संगम तट पर श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लग गईं। श्रद्धालुओं ने माँ गंगा, माँ यमुना और माँ सरस्वती के पावन जल में स्नान कर सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और शांति की कामना की। स्नान के उपरांत दान-पुण्य, जप-तप और पूजा-अर्चना का क्रम देर शाम तक चलता रहा।
प्रशासन की ओर से मेला क्षेत्र में सुरक्षा, स्वच्छता, यातायात, स्वास्थ्य एवं पेयजल की व्यापक व्यवस्थाएं की गई थीं। पुलिस और स्वयंसेवी संगठनों की सक्रियता से श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा नहीं हुई। घाटों पर गोताखोरों और राहत टीमों की तैनाती भी की गई थी।
माघ मेला न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा और सामाजिक समरसता का जीवंत प्रतीक भी है। एक माह तक चलने वाले इस मेले में कल्पवासी संगम तट पर रहकर संयम, तप और साधना के साथ जीवन यापन करते हैं। संतों के प्रवचन, धार्मिक अनुष्ठान और सांस्कृतिक कार्यक्रम मेला की आध्यात्मिक गरिमा को और बढ़ाते हैं।
इस पावन अवसर पर यही प्रार्थना की गई कि माँ गंगा, माँ यमुना और माँ सरस्वती सभी श्रद्धालुओं के मनोरथ पूर्ण करें तथा समाज में शांति, सद्भाव और कल्याण का संचार हो।

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