लखनऊ : सांस्कृतिक महाकुंभ लखनऊ, के आंगन में ‘विकसित भारत’ की संकल्पना पिरोता पुस्तकों का मेला।
डेस्क, आपकी आवाज़ न्यूज़, लखनऊ यूपी
∆ “जहाँ शब्दों का संगम और ज्ञान का सवेरा हो, वहीं एक सभ्य समाज का बसेरा हो।”
∆ मुफ्त प्रवेश और सभी पुस्तकों पर न्यूनतम 10 प्रतिशत की छूट, मेले में लगभग 60 स्टॉल सजाए गए हैं।
लखनऊ, 14 मार्च : नवाबों की नगरी और साहित्य की उर्वर धरा लखनऊ का चारबाग स्थित रवीन्द्रालय परिसर आज से अक्षरों की आभा से आलोकित हो उठा है। ‘विज़न-2047: विकसित भारत-विकसित प्रदेश’ की प्रेरणादायी थीम पर आधारित 10 दिवसीय लखनऊ पुस्तक मेले का भव्य शुभारंभ शुक्रवार को प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय द्वारा किया गया। यह मेला केवल पुस्तकों का विक्रय केंद्र नहीं, बल्कि भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक तकनीक के सेतु के रूप में उभर कर सामने आया है।

शिक्षा का आधार: अपनी संस्कृति और पुस्तकें!
मुख्य अतिथि योगेंद्र उपाध्याय ने दीप प्रज्ज्वलन कर मेले का उद्घाटन करते हुए कहा कि पुस्तकें मनुष्य की सबसे सच्ची मित्र, निस्वार्थ मार्गदर्शक और साक्षात गुरु के समान हैं। उन्होंने मैकाले की शिक्षा पद्धति पर प्रहार करते हुए जोर दिया कि नई पीढ़ी को अपनी जड़ों और गौरवशाली संस्कृति से जुड़ना अनिवार्य है। मंत्री जी ने महाविद्यालयों के विद्यार्थियों को इस ज्ञान-विज्ञान के संचय का लाभ उठाने का आह्वान किया और विभागीय स्तर पर भी निर्देश जारी किए।
मेले की प्रमुख झलकियाँ: परंपरा और तकनीक का मेल!
मुफ्त प्रवेश और हर पुस्तक पर न्यूनतम 10 प्रतिशत की छूट वाले इस मेले में इस बार लगभग 60 स्टॉल सजाए गए हैं। मेले की कुछ खास विशेषताएं इस प्रकार हैं:
- डिजिटल नवाचार: मेले में नई टेक्नोलॉजी से छपी पुस्तकों के साथ-साथ डिजिटल प्रकाशन उत्पादों की भरमार है, जो ‘विकसित भारत’ के सपने को तकनीकी आधार प्रदान कर रहे हैं।
- राष्ट्रीय भागीदारी: नेशनल बुक ट्रस्ट (NBT), हिन्द युग्म, वाणी, राजकमल और पेंगुइन जैसे दिग्गज प्रकाशकों के साथ-साथ आगरा, दिल्ली, रायपुर और जयपुर के प्रमुख प्रकाशनों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है।
- चित्रकला का अनूठा प्रदर्शन: ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में युवा कलाकार 15 फीट के विशाल कैनवस पर अपनी तूलिका से राष्ट्रभक्ति के रंग उकेरेंगे।
- अवधी स्वाद: साहित्य के साथ-साथ लखनऊ के प्रसिद्ध अवधी व्यंजनों का उत्सव भी आगंतुकों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
साहित्यिक आयोजनों की श्रृंखला!
मेले के संयोजक मनोज सिंह चंदेल और निदेशक आकर्ष चंदेल ने बताया कि आगामी 22 मार्च तक प्रतिदिन सुबह 11:00 बजे से रात 9:00 बजे तक रवीन्द्रालय परिसर में वैचारिक विमर्श का दौर चलेगा। यहाँ ‘ऑथर्स अड्डा’ में पाठकों को सीधे लेखकों से संवाद करने का मौका मिलेगा, तो वहीं मुशायरों और कवि सम्मेलनों में लखनऊ की तहजीब और शायरी की खुशबू बिखरेगी।
आज के प्रमुख कार्यक्रम (14 मार्च):
| समय | कार्यक्रम | आयोजक/विवरण |
| 11:00 AM | पुस्तक लोकार्पण | नवसृजन प्रकाशन |
| 03:30 PM | किताब पर चर्चा | डॉ. शिप्रा की कृति पर विमर्श |
| 05:00 PM | ऑथर्स अड्डा | लेखकों से सीधा संवाद |
| 05:30 PM | पुस्तक लोकार्पण | ‘अवध के मंदिर’ (ऐतिहासिक विमर्श) |
| 07:30 PM | काव्य गोष्ठी | साहित्य साधक मंच |
यह आयोजन लखनऊ की साहित्यिक विरासत को आगे बढ़ाते हुए युवाओं में पढ़ने की संस्कृति (Reading Culture) को पुनर्जीवित करने का एक सशक्त प्रयास है। संरक्षक मुरलीधर आहूजा और टीपी हवेलिया के अनुसार, जब हर घर में अपनी निजी लाइब्रेरी होगी, तभी समाज में बौद्धिक क्रांति आएगी।
“किताबों के पन्नों में ही छिपा है भविष्य का उजाला, आओ मिलकर थामें ज्ञान का यह पावन प्याला।”