कुशीनगर : कृषि विज्ञान केन्द्र सरगटिया में 25 दिवसीय उद्यमिता प्रशिक्षण का 8वां दिन सम्पन्न, 100 किसानों को मिली आधुनिक खेती व मूल्यवर्धन की जानकारी।
धनंजय कुमार पाण्डेय, आपकी आवाज़ न्यूज़, कुशीनगर
∆ 25 दिवसीय प्रशिक्षण में युवाओं को सिखाए जा रहे कृषि आधारित स्टार्टअप के गुर!
∆ उपनिदेशक कृषि ने धान की जल जमाव प्रजातियों व सरकारी योजनाओं पर दी विस्तृत जानकारी!
∆ ‘श्री अन्न’ और सब्जी उत्पादन में मूल्यवर्धन से बढ़ेगी किसानों की आय!
∆ मौसम, यंत्रीकरण और आधुनिक सस्य पद्धति पर विशेषज्ञों ने किया मार्गदर्शन!
∆ जनपद के सभी ब्लॉकों से पहुंचे लगभग 100 किसानों ने लिया प्रशिक्षण!

कुशीनगर। जनपद के कृषि विज्ञान केन्द्र, सरगटिया में सब मिशन ऑन एग्रीकल्चर एक्सटेंशन योजनान्तर्गत आयोजित 25 दिवसीय ग्रामीण युवाओं के उद्यमिता विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम का 8वां दिवस उत्साहपूर्वक सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में जिले के सभी विकास खंडों से लगभग 100 किसानों एवं ग्रामीण युवाओं ने भाग लिया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपनिदेशक कृषि कुशीनगर श्री अतीन्द्र सिंह उपस्थित रहे। उन्होंने जल जमाव वाली धान की उन्नत प्रजातियों, आधुनिक सस्य पद्धतियों, फसल प्रबंधन तकनीकों तथा कृषि उत्पादों के मूल्य वर्धन के माध्यम से उद्यमिता विकास की संभावनाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। साथ ही केन्द्र एवं राज्य सरकार द्वारा संचालित विभिन्न कृषि योजनाओं की जानकारी देते हुए किसानों को उनका लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया।

भूमि संरक्षण अधिकारी श्री सुदीप वर्मा ने मृदा संरक्षण एवं जल प्रबंधन के महत्व पर जोर देते हुए किसानों को टिकाऊ खेती अपनाने की सलाह दी। केन्द्र के प्रभारी डा. पुष्पेन्द्र प्रताप सिंह ने सब्जियों की उन्नत खेती, उत्पादन तकनीक एवं मूल्य संवर्धन के माध्यम से आय बढ़ाने के उपाय बताए।
प्रशिक्षण कार्यक्रम के कोर्स डायरेक्टर डा.अरुण प्रताप सिंह ने मोटे अनाज (श्री अन्न) की बढ़ती उपयोगिता, उत्पादन तकनीक एवं बाजार में उनकी मांग पर चर्चा करते हुए किसानों को श्री अन्न आधारित उद्यम स्थापित करने के लिए प्रेरित किया। वरिष्ठ शोधकर्ता विशाल सिंह ने कृषि में मौसम की भूमिका एवं कृषि यंत्रीकरण के महत्व पर प्रशिक्षण प्रदान किया।
इस अवसर पर एडीओ पीपी तमकुही राज कृपा शंकर चौधरी सहित अन्य कर्मचारियों ने भी प्रशिक्षण कार्यक्रम को सफल बनाने में सक्रिय योगदान दिया।
कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीण युवाओं को आत्मनिर्भर बनाते हुए कृषि को लाभकारी उद्यम के रूप में विकसित करना है, जिससे वे आधुनिक तकनीकों एवं सरकारी योजनाओं का लाभ उठाकर अपनी आय में वृद्धि कर सकें। किसानों ने प्रशिक्षण को उपयोगी बताते हुए इसे रोजगार सृजन की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया।