कुशीनगर : पडरौना नगर में 1.2830 हेक्टेयर जमीन घोटाला, रानी शरद कुमारी व जिपं अध्यक्ष के बेटों समेत 15 पर कोर्ट के आदेश से FIR दर्ज।

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डेस्क, आपकी आवाज़ न्यूज़, उत्तर प्रदेश

∆ मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश पर कोतवाली में दर्ज हुई बड़ी FIR दर्ज!

∆ 1.2830 हेक्टेयर आराजी संख्या 604 को लेकर गहराया विवाद!

∆ राजदरबार बनाम सुरेंद्र यादव: पीढ़ियों पुरानी जमीन पर स्वामित्व की जंग!

∆ जिपं अध्यक्ष के दो बेटे भी आरोपियों में शामिल!

∆ धोखाधड़ी, कूटरचना और फर्जी बैनामे की लगी गंभीर धाराएं!

∆ पहले भी 5.3140 हेक्टेयर भूमि प्रकरण में दर्ज हो चुकी है रिपोर्ट!

∆ राजस्व अभिलेखों में हेराफेरी का आरोप, तहसील कर्मियों की भूमिका संदिग्ध!

∆ बीते कई वर्षों से हाईकोर्ट में लंबित है जमीन से जुड़ा मुकदमा!

∆ पूर्व में बने कई मकान स्वामियों पर घर छिनने का खतरा मंडराया!

∆ डीएम जांच रिपोर्ट पर अब तक कार्रवाई नहीं, प्रशासन पर उठे सवाल।

पडरौना, कुशीनगर।
जनपद कुशीनगर में जमीन फर्जीवाड़े का एक बड़ा मामला सामने आया है। 1.2830 हेक्टेयर आराजी संख्या 604 को लेकर चल रहे विवाद में कोर्ट के आदेश पर कोतवाली पुलिस ने पडरौना राजदरबार की रानी शरद कुमारी समेत 15 लोगों के खिलाफ गंभीर धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की है।
यह कार्रवाई मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश के बाद जंगल बेलवा टोला चौरिया निवासी सुरेंद्र यादव की याचिका पर की गई।
∆ क्या है पूरा मामला?

जिले के थाना कोतवाली पडरौना क्षेत्र में जमीन हड़पने के आरोप में 15 नामजद आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। यह कार्रवाई न्यायालय के आदेश पर जंगल बेलवा टोला चौररिया निवासी सुरेंद्र यादव की तहरीर पर की गई है।

वादी सुरेंद्र यादव ने आरोप लगाया है कि वह आराजी संख्या 604, रकबा 1.2830 हेक्टेयर भूमि के वैध मालिक हैं। यह भूमि उनके पूर्वजों के नाम राजस्व अभिलेखों में दर्ज थी और पिता की मृत्यु के बाद उनके नाम पर दर्ज हुई। आरोप है कि शारद कुमारी सहित अन्य आरोपियों ने मिलीभगत और कूटरचना कर इस भूमि का फर्जी बैनामा करा लिया।

मुकदमे में शारद कुमारी पुत्री अनुरुद्ध प्रताप सिंह, गिरीजेश कुमार जायसवाल पुत्र प्रदीप जैसवाल, सज्जाद अली, अखिलेश तिवारी, मनीष जायसवाल पुत्र रमाशंकर प्रसाद, संजीव जायसवाल पुत्र प्रदीप जैसवाल, सूर्यप्रकाश शुक्ला पुत्र बहादुर शुक्ला, सतीशचंद्र कुशवाहा पुत्र घनश्याम कुशवाहा, अनिल जैसवाल, धीरज कुमार, राहुल श्रीवास्तव, वीरेंद्र, अभिजीत जैसवाल, अमित चौरसिया और दीपक कुमार सहित कुल 15 लोगों को नामजद किया गया है। वादी का आरोप है कि सभी आरोपियों ने साजिश के तहत जालसाजी कर दस्तावेज तैयार किए और जानबूझकर झूठी गवाही देकर बैनामा कराया। पीड़ित सुरेंद्र यादव ने बताया कि उन्होंने पहले थाना और फिर पुलिस अधीक्षक को शिकायत दी थी, लेकिन कार्रवाई न होने पर उन्हें न्यायालय की शरण लेनी पड़ी। न्यायालय के आदेश पर 10 फरवरी 2026 को कोतवाली पडरौना में भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच उपनिरीक्षक आकाश वर्मा को सौंपी है। पडरौना हर्षवर्धन सिंह ने बताया कि मामले की निष्पक्ष जांच और विवेचना कर आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जा रही है। यह मामला क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है, क्योंकि एफआईआर में कई बड़े और चर्चित नाम शामिल हैं। इनमें राज परिवार से जुड़ी एक हिस्सेदार शारद देवी और वर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष सावित्री जायसवाल के पुत्रों सहित कई प्रमुख व्यक्ति शामिल हैं।

∆ किन-किन पर दर्ज हुई FIR?
कोर्ट के आदेश पर दर्ज प्राथमिकी में रानी शरद कुमारी के अलावा जिला पंचायत अध्यक्ष सावित्री जायसवाल के पुत्र गिरिजेश कुमार जायसवाल, संजीव कुमार जायसवाल सहित कुल 15 लोगों के नाम शामिल हैं। सभी पर धोखाधड़ी, जालसाजी और फर्जी बैनामा कराने जैसी गंभीर धाराएं लगाई गई हैं।

∆ पहले भी दर्ज हो चुकी है रिपोर्ट!
गौरतलब है कि जनवरी माह में 5.3140 हेक्टेयर भूमि के अवैध बैनामे को लेकर रानी शरद कुमारी की तहरीर पर सुरेंद्र यादव समेत नौ लोगों पर प्राथमिकी दर्ज की गई थी। इस प्रकार दोनों पक्षों में जमीन को लेकर कानूनी जंग तेज हो गई है।

∆ राजस्व विभाग की भूमिका पर सवाल!
सूत्रों के अनुसार, राजदरबार की जमीन का रिसीवर जिलाधिकारी होता है। बावजूद इसके अभिलेखों में कथित हेराफेरी कर जमीन का नामांतरण किया गया। वहीं इस पुरे मामले में तहसील के कुछ राजस्व कर्मियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में बताई जा रही है।
बताया जा रहा है कि खड्डा से लेकर पडरौना शहर तक राजदरबार की कई जमीनों के रिकॉर्ड में बदलाव कर कुछ लोगों ने अपना नाम दर्ज करा लिया और कालोनियां तक बस गईं।

∆ हाईकोर्ट में भी मामला लंबित!
जमीन विवाद से जुड़े कई मुकदमे हाईकोर्ट में विचाराधीन हैं। डीएम स्तर पर जांच कराई जा चुकी है और करीब एक माह पूर्व रिपोर्ट भी सौंप दी गई, लेकिन अभी तक प्रशासनिक कार्रवाई नहीं होने से सवाल उठ रहे हैं।

∆ मकान मालिकों पर गहराया संकट!
इस विवाद के कारण उन लोगों के सामने संकट खड़ा हो गया है जिन्होंने विवादित जमीन पर मकान बना लिए हैं। यदि अदालत का फैसला किसी एक पक्ष के खिलाफ जाता है तो दर्जनों परिवारों के सामने बेघर होने की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

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