कुशीनगर : तदर्थ प्रधानाचार्यों के स्थाईकरण को लेकर प्रधानाचार्य परिषद आर-पार की लड़ाई को तैयार।
धनंजय कुमार पाण्डेय, व्यूरो चीफ, उत्तर प्रदेश
∆ वर्षों से तदर्थ रूप में कार्यरत प्रधानाचार्यों के स्थाईकरण की मांग ने पकड़ा जोर!
∆ कुशीनगर में आयोजित कार्यकारी बैठक में प्रधानाचार्य परिषद ने दिखाई एकजुटता!
∆ प्रांतीय महामंत्री बोले—सेवा-सुरक्षा से जुड़ा है तदर्थ प्रधानाचार्यों का भविष्य!
∆ मुख्यमंत्री को सौंपा गया पत्रक, शासन पर अतिरिक्त वित्तीय भार न होने का दावा!
∆ शासन स्तर पर उदासीनता से प्रधानाचार्य वर्ग में रोष और असंतोष व्याप्त!
कुशीनगर। 08 फरवरी 2026
उत्तर प्रदेश प्रधानाचार्य परिषद तदर्थ प्रधानाचार्यों के स्थाईकरण की मांग को लेकर पूरी तरह से कटिबद्ध नजर आ रही है। परिषद ने इस मुद्दे को निर्णायक मोड़ तक ले जाने का संकल्प लिया है। यह बातें परिषद के प्रांतीय महामंत्री शैलेंद्र दत्त शुक्ल ने जनपद कुशीनगर में आयोजित प्रधानाचार्य परिषद की कार्यकारी बैठक को संबोधित करते हुए कही।
उत्तर प्रदेश प्रधानाचार्य परिषद, कुशीनगर की एक आवश्यक बैठक रघुनाथ उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, कुबेरस्थान में संपन्न हुई। बैठक की अध्यक्षता करते हुए जिलाध्यक्ष डॉ. देवेंद्र मणि ने कहा कि जनपद सहित पूरे प्रदेश में बड़ी संख्या में प्रधानाचार्य वर्षों से तदर्थ आधार पर सेवाएं दे रहे हैं। उनके स्थाईकरण में न तो कोई वैधानिक बाधा है और न ही प्रशासनिक अड़चन, इसके बावजूद शासन द्वारा इस दिशा में अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई है, जिससे प्रधानाचार्य वर्ग में गहरा रोष एवं असंतोष व्याप्त है।
बैठक में उपस्थित प्रधानाचार्यों की शंकाओं और जिज्ञासाओं के समाधान हेतु प्रांतीय महामंत्री शैलेंद्र दत्त शुक्ल को आमंत्रित किया गया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि तदर्थ प्रधानाचार्यों के स्थाईकरण का मुद्दा अत्यंत ज्वलंत है और यह सीधे तौर पर सेवा-सुरक्षा से जुड़ा हुआ है। इसी गंभीरता को देखते हुए प्रांतीय अध्यक्ष मणि शंकर तिवारी के निर्देश पर दिनांक 14 जनवरी 2026 को अपर मुख्य सचिव, माध्यमिक शिक्षा को वार्ता हेतु पत्र प्रेषित किया गया था, किंतु अब तक इस पर कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं मिली है।
उन्होंने जानकारी दी कि परिस्थितियों की गंभीरता को देखते हुए परिषद के एक प्रतिनिधिमंडल ने दिनांक 31 जनवरी 2026 को दिनेश पांडेय, अशोक द्विवेदी एवं रघुनाथ सिंह के साथ माननीय मुख्यमंत्री को एक पत्रक सौंपा। पत्र में यह स्पष्ट किया गया कि तदर्थ प्रधानाचार्यों के स्थाईकरण से शासन पर किसी भी प्रकार का अतिरिक्त वित्तीय भार नहीं पड़ेगा। साथ ही यह भी रेखांकित किया गया कि अनेक प्रधानाचार्य दीर्घकालीन सेवा पूर्ण कर सेवानिवृत्ति की अवस्था में पहुंच चुके हैं, ऐसे में उन्हें पद से हटाना न केवल अन्यायपूर्ण बल्कि उनकी गरिमा के भी विपरीत होगा।
प्रांतीय महामंत्री ने यह आरोप भी लगाया कि शासन स्तर पर अधिकारी माननीय मुख्यमंत्री को वास्तविक तथ्यों से पूर्ण रूप से अवगत नहीं करा रहे हैं, जिसके चलते यह विसंगति बनी हुई है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि उत्तर प्रदेश प्रधानाचार्य परिषद इस मुद्दे को लेकर हर स्तर पर संघर्षरत है और शीघ्र समाधान के लिए सतत प्रयास जारी रखेगी।
बैठक को जिला मंत्री गोविंद मिश्रा ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम का संचालन कोषाध्यक्ष अशोक कुमार ने किया, जबकि दिशा-निर्देश संरक्षक एवं कार्यकारी अध्यक्ष अश्वनी पांडे द्वारा प्रदान किए गए।
इस अवसर पर प्रमुख रूप से दुर्ग दयाल तिवारी, विनोद तिवारी, सी.बी. सिंह, एस.पी. सिंह, गोविंद प्रसाद, साधु शरण पांडे सहित बड़ी संख्या में प्रधानाचार्य उपस्थित रहे।