कुशीनगर : आस्था पर चला कसया नगरपालिका का बुलडोजर! सदियों पुराने शिव मंदिर व छठ बेदियों को तोड़ने से भड़का जनाक्रोश।
धनंजय कुमार पाण्डेय, व्यूरो चीफ, उत्तर प्रदेश
∆ कसया नगरपालिका की जेसीबी कार्रवाई से धार्मिक आस्था को गहरा आघात!
∆ कसया के वार्ड नंबर 7 सिद्धार्थनगर में विकास के नाम पर सदियों पुराना शिव मंदिर बना निशाना!
∆ हिंदू आस्था से जुड़ी मंदिर के सामने बनी छठ माता की बेदियां जमींदोज!
∆ मन्दिर परिसर में बने यज्ञशाला को तोड़ने से ग्रामीणों में भरा आक्रोश!

∆ बिना नापी और सीमांकन के ही आस्था पर प्रहार, कसया नगरपालिका की चली जेसीबी!
∆ पैसे के दम पर पोखरे की जमीन पर बने मकान, लेखपाल और नगरपालिका की मिलीभगत का लग रहा आरोप!
∆ आस्था के केंद्र को जताया जा रहा “अवैध अतिक्रमण” कागजों में 27 कट्ठा पोखरा, मंदिर उससे अलग बताया जा रहा!
∆ पोखरे की जमीन वाले अवैध कब्जाधारियों पर नहीं चली नगरपालिका की चाबूक! पोखरे के 6 से 7 कट्ठा जमीन की कमी को आस्था से पाटने की हो रही कोशिश।
∆ पश्चिमी छोर की छठ बेदियों को तोड़कर की जा रही “भूमि की पूर्ति”! कसया नगरपालिका अध्यक्ष की चुप्पी पर उठे सवाल।

मल्लूडीह, कसया/कुशीनगर
कुशीनगर जिले के कसया नगरपालिका क्षेत्र अंतर्गत वार्ड नंबर 7 सिद्धार्थनगर में स्थित सदियों पुराना शिव मंदिर, जो कई दशकों से हिंदू धर्म की आस्था का प्रमुख केंद्र रहा है, उस समय विवादों में आ गया जब कसया नगरपालिका की जेसीबी ने मंदिर के सामने बनी छठ माता की बेदियों और मंदिर परिसर में स्थित यज्ञशाला को मनमाने ढंग से ध्वस्त कर दिया।
इस कार्रवाई के बाद क्षेत्र में भारी जनाक्रोश देखने को मिल रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यह सिर्फ एक निर्माण नहीं, बल्कि उनकी आस्था और परंपरा पर सीधा हमला है। हैरानी की बात यह है कि इस कार्रवाई से पूर्व न तो कोई स्पष्ट नोटिस दिया गया और न ही विधिवत भूमि की नापी कराई गई।

ग्रामीणों का आरोप है कि सरकारी कागजों में शिव मंदिर के सामने कुल 27 कट्ठा जमीन पोखरे के रूप में दर्ज है, जबकि शिव मंदिर उस पोखरे की जमीन से अलग स्थित है। इसके बावजूद पोखरे के पूर्वी छोर पर कुछ लोगों द्वारा अवैध तरीके से पोखरे की जमीन पर अवैध रूप से कब्जा कर पक्के मकान बना लिए गए हैं, जिन पर आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
स्थानीय लोगों का सीधा आरोप है कि इन अवैध कब्जों के पीछे नगरपालिका और संबंधित लेखपाल की मिलीभगत है। पैसे के दम पर पोखरे की जमीन पर कब्जा कराया गया और अब जब पोखरे की पूरी नापी कराए बिना निर्माण कार्य की योजना बनाई जा रही है, तो लगभग 6 से 7 कट्ठा जमीन की कमी सामने आ रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि इस जमीन की कमी को पूरा करने के लिए पोखरे के पश्चिमी छोर पर स्थित भीटे की जमीन पर बनी छठ माता की बेदियों को तोड़कर भूमि की “पूर्ति” की जा रही है, जो न केवल अवैध है बल्कि धार्मिक भावनाओं के साथ खुला खिलवाड़ भी है।
इस पूरे मामले को लेकर जब ग्रामीणों ने कसया नगरपालिका अध्यक्ष से संपर्क किया, तो उनके द्वारा कोई भी संतोषजनक या सार्थक जवाब नहीं दिया गया। अध्यक्ष की चुप्पी ने संदेह को और गहरा कर दिया है।
ग्रामीणों ने मांग की है कि पोखरे की पूरी जमीन की निष्पक्ष नापी कराई जाए, अवैध कब्जों पर तत्काल कार्रवाई हो और धार्मिक स्थलों को हुए नुकसान की जिम्मेदारी तय की जाए। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि मामले की निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो वे आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या कसया नगरपालिका और लेखपाल की कथित मिलीभगत की जांच होगी, या फिर आस्था के केंद्र इसी तरह प्रशासनिक लापरवाही की भेंट चढ़ते रहेंगे?