कुशीनगर : बोर्ड परीक्षा केंद्र निर्धारण में बड़ा खेल! मानकों की जम कर उड़ाई गई धज्जियां।
धनंजय कुमार पाण्डेय, व्यूरो चीफ, उत्तर प्रदेश
🟠 छात्र घटे, केंद्र बढ़े — कुशीनगर में इतिहास का सबसे बड़ा ‘जेम्बो केंद्र’ घोटाला? नियमों की खुलेआम अनदेखी, धनउगाही के आरोपों से घिरे डीआईओएस
🔴 सूत्रों का दावा: 56 अतिरिक्त केंद्रों से लगभग 50 लाख से अधिक की अवैध वसूली! नकलविहीन परीक्षा की मंशा पर पानी फेरने की है पूरी तैयारी?
🟢 छात्र कम, फिर भी परीक्षा केंद्रों की रिकॉर्ड बढ़ोतरी — बड़ा खेल!
🟠 नियमों को दरकिनार कर इतिहास के सबसे ज्यादा 194 केंद्र किए गए चयनित!
🟡 वित्तविहीन विद्यालयों को प्राथमिकता, राजकीय–एडेड पीछे! बोर्ड की सूची से अलग 56 अतिरिक्त केंद्र, सवालों के घेरे में, डीआईओएस
🟣 सूत्रों का दावा: केंद्र आवंटन में 50 लाख से अधिक की अवैध वसूली! सीसीटीवी, बाउंड्रीवाल, स्ट्रांग रूम जैसे मानकों की अनदेखा!
कुशीनगर।
उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद की हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट बोर्ड परीक्षा को लेकर कुशीनगर जनपद में इस वर्ष परीक्षा केंद्र निर्धारण ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। केंद्र आवंटन प्रक्रिया में न केवल नियमों और मानकों की अनदेखी की गई, बल्कि भ्रष्टाचार की तीखी बू भी अब खुलकर सामने आने लगी है।
जानकारों और विश्वसनीय सूत्रों की मानें तो इस वर्ष परीक्षा केंद्र निर्धारण में भारी धनउगाही कर मानकविहीन और कम छात्र संख्या वाले विद्यालयों को केंद्र बना दिया गया। यही कारण है कि जहां पिछले वर्ष छात्र संख्या अधिक होने के बावजूद 152 परीक्षा केंद्र बनाए गए थे, वहीं इस वर्ष लगभग 7 हजार छात्र कम होने के बावजूद रिकॉर्ड 194 परीक्षा केंद्र आवंटित कर दिए गए।
🔵 संख्या घटने पर भी केंद्रों की बाढ़!
वर्ष 2024-25 में बोर्ड परीक्षा को पारदर्शी और सुचारु रूप से संपन्न कराने के लिए जनपद में 152 परीक्षा केंद्र बनाए गए थे। नियमानुसार छात्र संख्या घटने पर केंद्रों की संख्या भी कम होनी चाहिए थी, और अनुमानतः इस वर्ष अधिकतम 138 केंद्र ही बनने चाहिए थे। इसके विपरीत, केंद्रों की संख्या बढ़ाकर 194 कर दी गई, जो अपने आप में संदेह पैदा करती है।
🔵 बोर्ड से तय 143, बना दिए गए 56 अतिरिक्त केंद्र!
यूपी बोर्ड द्वारा परीक्षा की शुचिता, गुणवत्ता और नकलविहीन आयोजन के उद्देश्य से जिले में पहले ही 143 परीक्षा केंद्रों की सूची जारी की गई थी। आपत्तियों के निस्तारण के बाद जिला केंद्र निर्धारण समिति की संस्तुति पर डीआईओएस को केवल 5-10 केंद्र घटाने या बढ़ाने का अधिकार था।
लेकिन कुशीनगर में डीआईओएस श्रवण कुमार गुप्त द्वारा 56 अतिरिक्त परीक्षा केंद्र आवंटित कर दिए गए, जो बोर्ड की गाइडलाइन का सीधा उल्लंघन माना जा रहा है।
🔵 220 से 280 छात्रों वाले विद्यालय भी बने केंद्र!
सूत्रों के अनुसार, कई ऐसे वित्तविहीन विद्यालयों को परीक्षा केंद्र बनाया गया है, जिनमें महज 220 से 280 परीक्षार्थी पंजीकृत हैं। जबकि बोर्ड के स्पष्ट निर्देश हैं कि प्राथमिकता क्रम में पहले राजकीय, फिर अनुदानित और अंत में मानक पूर्ण करने वाले वित्तविहीन विद्यालयों को ही केंद्र बनाया जाए।
🟤 बुनियादी सुविधाओं पर भी सवाल!
जानकार बताते हैं कि परीक्षा केंद्र बनने के लिए विद्यालय में सीसीटीवी, बाउंड्रीवाल, बिजली, पानी, शौचालय, स्ट्रांग रूम, डबल लॉक अलमारी और सुरक्षा व्यवस्था अनिवार्य है। आरोप है कि 56 नए बनाए गए कई केंद्र इन मानकों पर खरे नहीं उतरते। यदि इनकी निष्पक्ष जांच कराई जाए, तो बोर्ड परीक्षा की निष्पक्षता पर पड़े खतरे के साथ-साथ जिम्मेदार अधिकारियों की मंशा भी उजागर हो सकती है।
🟤 नकल माफिया को खुला मैदान?
चर्चा यह भी है कि केंद्रों की संख्या बढ़ाने का उद्देश्य नकल माफियाओं को मजबूत करना और परीक्षा के दौरान ‘सुविधा शुल्क’ के नाम पर मनमानी वसूली का रास्ता खोलना है। इससे यूपी बोर्ड की नकलविहीन परीक्षा की मंशा पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग गया है।
अब देखना यह है कि शासन और बोर्ड इस पूरे मामले पर क्या रुख अपनाते हैं, और क्या कुशीनगर में परीक्षा केंद्र निर्धारण की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी या यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।