कुशीनगर/यू.पी.बोर्ड परीक्षा केंद्र आवंटन में बड़ा खेल!—मानक दरकिनार, मोटी डीलिंग के नाम पर केंद्रों का हुआ बंटवारा?
धनंजय कुमार पाण्डेय, व्यूरो चीफ, उत्तर प्रदेश
∆ योगी सरकार के जीरो टॉलरेंस नीति की उड़ रही धज्जियां, परीक्षा केंद्र आवंटन में बड़ा खेल—मानक ताक पर, मोटी डीलिंग आगे!
∆ नकल माफिया–विभाग गठजोड़ सक्रिय; सीएम योगी के संकल्प को दे रहे खुली चुनौती!
∆ 13 कमरे वाला स्कूल 29 कमरों का बना—डीआईओएस रिपोर्ट पर उठे सवाल।
∆ मानक पूर्ण विद्यालय बाहर, वित्तविहीन–अमानक स्कूलों को मिला केंद्र!
∆ परीक्षार्थी घटे, केंद्र बढ़े—कुशीनगर में परीक्षा केंद्र चयन प्रक्रिया सवालों के घेरे में!
कुशीनगर।
यू.पी.बोर्ड परीक्षा 2026 से पहले ही परीक्षा केंद्रों के चयन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। आरोप है कि शासन की स्पष्ट गाइडलाइन को ताक पर रखकर कई विद्यालयों को मनमाने ढंग से परीक्षा केंद्र बनाया गया है। चर्चाओं के बाजार में यह बात गर्म है कि बिना मानक वाले विद्यालयों को डेढ़ से दो लाख रुपये तक लेकर केंद्र सूची में शामिल किया गया है। तेरह कमरों और बिना बाउंड्रीवाल वाला नेशनल पब्लिक स्कूल इसका प्रमुख उदाहरण बताया जा रहा है, जिसे विभागीय अधिकारियों की रिपोर्ट में मानक अनुरूप दिखाकर केंद्र का दर्जा दे दिया गया।
सूत्रों का दावा है कि इस पूरे खेल में नकल माफियाओं और कुछ विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत उजागर होने लगी है। ऐसा माना जा रहा है कि यह गठजोड़, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नकलविहीन एवं पारदर्शी परीक्षा कराने के संकल्प पर सीधा प्रहार करने के लिए तैयार बैठा है।
🔴 मानक से उलट स्कूल, फिर भी परीक्षा केंद्र—किसके इशारे पर?
हाटा तहसील के तुर्कडिहा स्थित लक्ष्मी सिंह इंटर कॉलेज में जहां वास्तविक रूप से केवल 13 कमरे हैं, वहीं डीआईओएस कार्यालय द्वारा बोर्ड को 29 कमरे दर्शाते हुए रिपोर्ट भेजी गई। इसी तरह तितला स्थित इंडियन पब्लिक इंटर कॉलेज में न तो निर्धारित संख्या में कक्ष हैं और न ही विद्यालय में बाउंड्रीवाल, फिर भी इसे परीक्षा केंद्र बना दिया गया।
इसके अतिरिक्त, कप्तानगंज क्षेत्र में उर्मिला देवी इंटर कॉलेज अहिरौली कुसम्हा सहित आठ वित्तविहीन विद्यालयों को परीक्षा केंद्र घोषित कर दिया गया, जबकि ये किसी भी सूरत में बोर्ड मानकों पर खरे नहीं उतरते।
🔵 परीक्षार्थी कम, केंद्र ज्यादा—आखिर क्यों?
पिछले वर्ष जनपद कुशीनगर में 152 परीक्षा केंद्र बनाए गए थे। इस वर्ष परीक्षार्थियों की संख्या 9,000 कम है। नियमों के अनुसार केंद्रों की संख्या में लगभग 18 की कमी होनी चाहिए थी, लेकिन इस बार उल्टा हो रहा है। सवाल है—किसके हित साधे जा रहे हैं?
🔴 वर्षों से सफलतापूर्वक परीक्षा कराने वाले विद्यालय हुए उपेक्षित!
कई ऐसे संस्थान जिन्हें पिछले दो दशक से लगातार परीक्षा केंद्र बनाया जाता रहा है, इस बार सूची से बाहर कर दिए गए हैं।
इनमें—
जानकी देवी इंटरमीडिएट, प्रसिद्ध मठिया
चंद्रावती देवी इंटर कॉलेज, पकड़ी बांगर
सहित लगभग आधा दर्जन स्कूल शामिल हैं।
ये सभी विद्यालय पूर्ण रूप से बोर्ड के मानकों के अनुरूप हैं और अतीत में बिना किसी विवाद या गड़बड़ी के परीक्षाओं का संचालन करते रहे हैं।
🔵 जानें—परीक्षा केंद्र बनाने के वास्तविक मानक क्या हैं!
विद्यालय में CCTV अनिवार्य
1000 क्षमता = 30 अंक, 750 = 20 अंक, 500 = 10 अंक
प्रयोगशाला सक्रिय एवं उपयोग में
91 बिंदुओं पर आधारित ऑनलाइन आवेदन
राज्य एवं जिला स्तर के परिणामों पर आधारित मेरिट
🔴 किन विद्यालयों को परीक्षा केंद्र नहीं बनाया जा सकता?
सड़क/गली की ओर खुलने वाले कक्ष
प्रबंधकीय विवाद वाले संस्थान
वित्तविहीन स्कूल जिनमें छात्र संख्या 125 से कम हो
पिछले तीन वर्षों में गड़बड़ी का रिकॉर्ड रखने वाले स्कूल।
🔴 बड़ा सवाल—क्या विभाग केंद्र आवंटन की जांच करवाएगा?
जनपद में उठ रहीं गंभीर आशंकाओं और बढ़ती शिकायतों को देखते हुए शिक्षकों एवं अभिभावकों में गहरी नाराजगी है। सवाल यह है कि—
क्या शासन इस संदेहास्पद प्रक्रिया की जांच कराएगा?
क्या नकली रिपोर्ट देकर केंद्र बनवाने वालों पर कार्रवाई होगी?
कुशीनगर में बोर्ड परीक्षा केंद्र आवंटन की प्रक्रिया अब जांच के दायरे में आने लगी है। आने वाले दिनों में इस मामले में क्या कदम उठते हैं, यह देखना बेहद दिलचस्प होगा।