कुशीनगर : किसानों की फ़ार्मर आईडी पर संकट! पोर्टल की खामियों ने बढ़ाई मुश्किलें, कई ग्रामसभाएँ सूची से गायब।
धनंजय कुमार पाण्डेय, व्यूरो चीफ, उत्तर प्रदेश
∆ फ़ार्मर आईडी बना सरकार का सिरदर्द—किसानों को मिल रहा सिर्फ़ आश्वासन!
∆ खतौनी–आधार मिसमैच से लटक गई योजनाओं की चाबी, किसान परेशान!
∆ सरकारी पोर्टल से गायब ग्रामसभाएँ—किसानों का भविष्य अधर में!
∆ कागज़ी दावों की पोल पट्टी—फ़ार्मर आईडी के लिए भटकते रहे किसान!
∆ बीकेयू (जनकल्याण) की सरकार से मांग—“तुरंत समाधान करो, किसानों को राहत दो!”
कप्तानगंज/कुशीनगर। 26 नवम्बर 2025
उत्तर प्रदेश सरकार भले ही प्रदेश के प्रत्येक किसान का फ़ार्मर आईडी बनाने की दिशा में तेजी से काम करने का दावा करती हो, लेकिन जमीनी हालात इससे बिल्कुल उलट हैं। कप्तानगंज तहसील समेत कई क्षेत्रों में किसानों को फ़ार्मर आईडी बनवाने में गंभीर दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
सबसे बड़ी समस्या उन किसानों की है जिनके नाम आधार कार्ड और खतौनी में अलग–अलग अंकित हैं। नाम के इस साधारण मिसमैच के कारण हज़ारों किसानों का फ़ार्मर आईडी बनना रुक गया है। वहीं जिन किसानों का नाम खतौनी में अंकित करने का आदेश जारी किया जा चुका है, उनका भी फ़ार्मर आईडी अभी तक नहीं बन पाया है।
स्थिति तब और गंभीर हो जाती है जब कप्तानगंज तहसील की कई ग्रामसभाएँ—खोटही, धोधरही, परसौनी, कुसमही, मोरवन और पकड़ी बांगर—सरकारी पोर्टल पर मौजूद ही नहीं हैं। ऐसे में इन गांवों के किसानों का फ़ार्मर आईडी बनना नामुमकिन हो गया है।
इस कारण किसान लगातार अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है। किसानों का कहना है कि जब तक इन तकनीकी और दस्तावेज़ी त्रुटियों को ठीक नहीं किया जाता, तब तक उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल सकता।
भारतीय किसान यूनियन (जनकल्याण) के प्रदेश अध्यक्ष रामचन्द्र सिंह ने इस गंभीर मुद्दे पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार के दावों की पोल खुल चुकी है। उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार और जनपद कुशीनगर के जिम्मेदार अधिकारियों से मांग की है कि–
“पोर्टल का सुधार कराते हुए नाम मिसमैच और ग्रामसभा गायब होने जैसी समस्याओं का तत्काल समाधान किया जाए, ताकि किसानों को फ़ार्मर आईडी का लाभ मिल सके।”
किसानों में बढ़ती नाराज़गी इस बात का संकेत है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ, तो ये मुद्दा बड़े आंदोलन का रूप ले सकता है।