पडरौना/राष्ट्रीय होमियोपैथ सेमिनार को लेकर हुई अहम बैठक, मार्च 2026 में कुशीनगर में होगा राष्ट्रीय आयोजन।
धनंजय कुमार पाण्डेय, व्यूरो चीफ, उत्तर प्रदेश
🔵 कुशीनगर बनेगा होमियोपैथी का राष्ट्रीय केंद्र — मार्च 2026 में होगा ऐतिहासिक सेमिनार!
🟢 डॉ. सी.पी. सिंह की अध्यक्षता में तय हुई सम्मेलन की रूपरेखा, देशभर के चिकित्सक होंगे शामिल!
🟡 हर माह की 20 तारीख को होगी चिकित्सकों की बैठक — पढ़ाई, बीमारियों और समस्याओं पर खुलकर चर्चा!
🔴 होम्योपैथी के प्रचार-प्रसार और अनुसंधान को नई दिशा देने की ऐतिहासिक पहल!
🟣 अंगवस्त्र और पुष्पगुच्छ से किया गया राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. सी.पी. सिंह का भव्य स्वागत!

पडरौना (कुशीनगर): 07 नवम्बर 2025
नगर के एम.आर.एम. पैलेस में देर रात होम्योपैथिक चिकित्सकों की एक महत्वपूर्ण बैठक सम्पन्न हुई, जिसमें सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि राष्ट्रीय स्तर का होमियोपैथिक सेमिनार आगामी 28-29 मार्च 2026 को कुशीनगर की पवित्र धरती पर आयोजित किया जाएगा।
बैठक की अध्यक्षता राष्ट्रीय रिसर्च सोसाइटी ऑफ होमियोपैथी इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. सी.पी. सिंह ने की। इस अवसर पर राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस की रूपरेखा और विभिन्न तैयारियों पर विस्तार से चर्चा हुई।
डॉ. सिंह ने कहा कि होम्योपैथी चिकित्सा विज्ञान की प्रासंगिकता और प्रभावशीलता को और मजबूत करने की दिशा में यह सम्मेलन मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने चिकित्सकों से एकजुट होकर होम्योपैथिक चिकित्सा के प्रचार-प्रसार और अनुसंधान पर जोर देने का आह्वान किया।

बैठक में यह भी तय किया गया कि हर माह की 20 तारीख को शाम 6 बजे से 8 बजे तक नियमित बैठकें होंगी, जिनमें चिकित्सक पढ़ाई, बीमारियों और चिकित्सा पद्धति से जुड़ी समस्याओं पर विचार-विमर्श करेंगे। इन बैठकों में पडरौना यूनिट के सभी चिकित्सकों की उपस्थिति अनिवार्य रहेगी।
बैठक के दौरान डॉ. सी.पी. सिंह का अंगवस्त्र और पुष्पगुच्छ भेंट कर भव्य स्वागत किया गया।
इस अवसर पर देवरिया के डॉ. आर.ए. कुशवाहा, कसया के डॉ. मृत्युंजय ओझा, पडरौना के डॉ. बी.के. राय, डॉ. विनीत श्रीवास्तव, डॉ. राजाराम जायसवाल, डॉ. धनंजय कुमार मिश्र, डॉ. श्रीश, डॉ. सागर कृष्ण मौर्य, डॉ. वेद प्रकाश तिवारी, डॉ. अभ्युदय मौर्य, डॉ. अरुण तिवारी, डॉ. अनिल कुशवाहा, डॉ. दीपक गौड़, डॉ. नीतीश कुमार यादव, सुनील मौर्य सहित कई वरिष्ठ चिकित्सक उपस्थित रहे।
बैठक को होम्योपैथी के प्रचार-प्रसार और अनुसंधान के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक पहल के रूप में देखा जा रहा है।