जिला संयुक्त चिकित्सालय कुशीनगर में आउटसोर्सिंग कर्मियों की सेवा समाप्त – 43 कर्मचारियों पर संकट, परिवारों में छाया मातम।

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धनंजय कुमार पाण्डेय, व्युरो चीफ, उत्तर प्रदेश

1️⃣ “बिना आदेश, नौकरी खत्म — मेडिकल कॉलेज प्राचार्य की मनमानी से 43 परिवार सड़क पर!”

2️⃣ “मुख्यमंत्री के निर्देशों की उड़ी धज्जियाँ — कुशीनगर मेडिकल कॉलेज में संविदा कर्मियों की बेरहमी से छुट्टी!”

3️⃣ “बिना नोटिस, बिना कारण… 7 साल की सेवा का अंत — प्राचार्य की कार्रवाई पर सवाल”

4️⃣ “गरीब कर्मियों की रोटी पर प्राचार्य का बुलडोज़र — 9000 वेतन वाले बने बेरोजगार!”

5️⃣ “शासन बोला किसी को नहीं हटाया जाएगा, लेकिन मेडिकल कॉलेज ने 43 को घर भेज दिया — जवाब कौन देगा?”

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कुशीनगर मेडिकल कॉलेज के 43 आउटसोर्सिंग कर्मियों के दर्द

कुशीनगर: 15 अक्टुबर 2025

कुशीनगर। जिला संयुक्त चिकित्सालय में वर्षों से कार्यरत आउटसोर्सिंग कर्मियों की सेवा अचानक समाप्त कर दिए जाने से हड़कंप मच गया है। सुरक्षा गार्ड, स्वीपर, एन.एम., माली सहित कुल 43 कर्मचारी, जो रामा इंफोटेक, शिवम ट्रेडर्स और अवनि परिधि प्रा. लि. लखनऊ जैसी एजेंसियों के माध्यम से साल 2018 से निरंतर सेवाएं दे रहे थे, अब बेरोजगारी की कगार पर आ गए हैं।

कर्मचारियों का कहना है कि मेडिकल कॉलेज प्रबंधन द्वारा बिना किसी सरकारी आदेश या कानूनी नोटिस के यह कह दिया गया कि “अब आपके पद समाप्त हो गए हैं, आप लोग अपने घर जाइए।” इस फैसले से सभी कर्मियों में भारी आक्रोश और निराशा है।

कर्मचारियों का दावा है कि शासन के आदेश में स्पष्ट रूप से कहा गया था कि “जिला अस्पताल को मेडिकल कॉलेज में समायोजित करते समय पुराने कर्मचारियों को यथावत रखा जाएगा, और केवल रिक्त पदों पर ही नई भर्ती होगी।” बावजूद इसके, पुराने कर्मचारियों को एक झटके में बाहर कर दिया गया।

प्रभावित कर्मचारियों ने कहा —

∆ “हम गरीब लोग हैं, महीने का मानदेय मात्र 9 से 12 हजार रुपये मिलता था। यही हमारे परिवार की आजीविका का सहारा था। अचानक नौकरी खत्म कर देने से बच्चों की पढ़ाई और घर का खर्च सब खतरे में पड़ गया है।”

कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के उस बयान का भी हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि —

∆ “किसी भी कर्मचारी को नौकरी से नहीं हटाया जाएगा, यदि कोई अधिकारी ऐसा करता है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।”

इस मामले में कर्मचारियों ने जिला प्रशासन और शासन से हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा है कि उनके भविष्य और परिवार की रोजी-रोटी को देखते हुए सेवा को पुनः बहाल किया जाए।

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