कुशीनगर/नेबुआ नौरंगिया खण्ड विकास अधिकारी आवास विवाद पर, डीएम का बड़ा एक्शन, मांगी तत्काल रिपोर्ट।
धनंजय कुमार पाण्डेय, व्यूरो चीफ, उत्तर प्रदेश
∆ नेबुआ नौरंगिया वीडियो आवास कांड! — ब्लॉक प्रमुख और बीडीओ की मिलीभगत पर उठे सवाल।
∆ वीडियो आवास गिराने में बड़ा खेल? — अधिकारी–जनप्रतिनिधि गठजोड़ पर जनता का फूटा गुस्सा।
∆ नेबुआ नौरंगिया ब्लॉक में भ्रष्टाचार की बू — बीडीओ और प्रमुख की भूमिका संदिग्ध!
∆ पांच वर्ष पूर्व पांच लाख की लागत से किए गए मरम्मत में धोखाधड़ी कर गिराया गया वीडियो आवास! – आखिर जिम्मेदार कौन?
∆ वायरल वीडियो ने खोली पोल — वीडियो आवास गिराए जाने के मामले में, ब्लॉक प्रमुख–बीडीओ पर कार्रवाई की मांग तेज।
ब्लॉक परिसर में आवास गिराने के विवाद ने अब प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए खबरों के बाद जिलाधिकारी कुशीनगर ने मामले का गंभीरता से संज्ञान लेते हुए खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) से तत्काल रिपोर्ट तलब की है।
कुशीनगर। नेबुआ नौरंगिया विकासखंड में खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) के सरकारी आवास को मरम्मत के नाम पर बिना किसी वैधानिक प्रक्रिया के ध्वस्त किए जाने का मामला अब प्रशासनिक हलकों में सुर्खियों में है। जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर ने इस पूरे प्रकरण पर संज्ञान लेते हुए विकास विभाग से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।
मामले की जानकारी के अनुसार, विकास खंड परिसर में स्थित बीडीओ आवास को बिना नीलामी और अनुमति प्रक्रिया के ही बुलडोजर से गिरा दिया गया। बताया जा रहा है कि बीडीओ ने इस कार्रवाई से खुद को अनभिज्ञ बताया है। उनका कहना है कि “आवास को ध्वस्त किए जाने की कोई अनुमति मैंने नहीं दी थी, इस संबंध में पूरी रिपोर्ट जिला प्रशासन को भेज दी गई है।”
इस घटना के बाद जिला विकास अधिकारी (डीडीओ) अरुण पांडेय ने तत्परता दिखाते हुए बीडीओ को शो कॉज नोटिस जारी किया और मौके का स्थलीय निरीक्षण भी किया। निर्धारित समय में जवाब न मिलने पर रिमाइंडर भेजा गया, लेकिन 15 दिन बीत जाने के बाद भी कोई जवाब नहीं मिला।
उधर, विवादित भवन का निर्माण कार्य तेजी से जारी है और बताया जा रहा है कि छत डालने की तैयारी तक पहुंच चुकी है। इस पर डीएम कुशीनगर ने नाराजगी जताते हुए विकास विभाग से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
डीडीओ अरुण पांडेय ने बताया कि “डीएम महोदय द्वारा मांगी गई रिपोर्ट भेज दी गई है। बीडीओ ने अब तक जवाब नहीं दिया है, जो गंभीर लापरवाही की श्रेणी में आता है। ऐसे में उनके विरुद्ध कार्रवाई हेतु उच्चाधिकारियों और शासन को रिपोर्ट प्रेषित की जा रही है।”
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि शासन स्तर पर इस पूरे विवाद पर क्या निर्णय लिया जाता है।