कुशीनगर: राशन वितरण में बड़ा झोल- बहादुरगंज में उजागर हुआ खाद्यान्न घोटाला!

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धनंजय कुमार पाण्डेय, व्युरो चीफ, उत्तर प्रदेश

1️⃣ गरीबों के हक का अनाज बना गंदगी का अड्डा- बहादुरगंज में निकला धूल और मिट्टी के टुकड़े सहित मरे हुए चूहे का कंकाल और सागौन के पत्ते, गलती या बड़ा घोटाला?

2️⃣ गेहूँ की बोरी से निकले सड़े चूहे और दस्ताने — कुशीनगर में राशन वितरण की गंदी हकीकत उजागर!

देखें मिलावटी राशन का पुरा वीडियो

3️⃣ सरकारी गोदामों में सड़ांध और साजिश — किसके संरक्षण में चल रहा है ‘मिलावट का खेल’?

4️⃣ बहादुरगंज कांड ने खोली सिस्टम की पोल — जांच नहीं हुई तो हर घर में पहुंचेगा जहरीला राशन।

5️⃣ भ्रष्टाचार की बोरियों से निकली शर्म — गरीबों के पेट में पहुंचाने से पहले ही खा गया सिस्टम!

कुशीनगर। 11 अक्टूबर 2025

सूबे की योगी सरकार जहाँ एक ओर भ्रष्टाचार और मिलावटखोरों पर लगातार शिकंजा कस रही है, वहीं दूसरी ओर कुशीनगर जिले में कुछ अधिकारी और सप्लाई माफिया मिलकर सरकार की छवि को धूमिल करने में लगे हैं। पडरौना ब्लॉक के बहादुरगंज ग्राम पंचायत से शुरू हुआ मिलावटी राशन कांड अब जिलेभर में चर्चा का विषय बन चुका है।

पिछले माह सरकारी गोदाम से उठाई गई राशन की गेहूँ की बोरियों में जब जांच हुई, तो उसके अंदर से निकले चावल, मिट्टी के बड़े-बड़े टुकड़े, सड़े हुए चूहे, दस्ताने और सागौन के पत्तों नें- पूरे सिस्टम की पोल खोल दी।

सूत्र बताते हैं कि यह कोई एक पंचायत की लापरवाही नहीं, बल्कि एक संगठित राशन सिंडिकेट है, जिसमें गोदाम से लेकर विभागीय दफ्तरों तक “कमाई की चेन” सक्रिय है।
हर महीने लाखों रुपये का मिलावटी खाद्यान्न गरीबों तक पहुँचाया जा रहा है, और ऊपर तक हिस्सेदारी की बात भी खुलकर हो रही है।

कुशीनगर जिले के पडरौना ब्लॉक के ग्राम पंचायत बहादुरगंज में भ्रष्टाचार की एक हैरान कर देने वाली कहानी सामने आई है। गरीबों के हक का अनाज बांटने में कुछ जिम्मेदारों ने ऐसी शर्मनाक लापरवाही की, जिसने व्यवस्था की जड़ों तक सवाल खड़ा कर दिया है।

पिछले माह सरकारी राशन गोदाम से उठाए गए गेहूँ की दर्जनों बोरियों में जब ग्रामीणों ने नजर डाली, तो नज़ारा चौकाने वाला था –
गेहूँ के साथ चावल, मिट्टी के बड़े-बड़े टुकड़े, सड़े हुए चूहे, हाथों में पहनने वाले कपड़े के दस्ताने, यहां तक कि सागौन के पत्ते तक मिले!

सूत्रों ने बताया कि जब उन्होंने इस गंदे व बदबूदार गेहूँ की शिकायत की, तो स्थानीय स्तर पर मामले को दबाने की कोशिशें शुरू हो गईं।
लोगों ने यहाँ तक कहा कि, “यह हमारे बच्चों के खाने का राशन है या किसी कूड़ाघर की मिट्टी?”

मामला केवल बहादुरगंज तक सीमित नहीं लगता। सूत्र बताते हैं कि कई ग्राम पंचायतों में इसी तरह के मिलावटी खाद्यान्न की शिकायतें पहले भी उठ चुकी हैं, लेकिन विभागीय कार्रवाई अब तक “कागजों” तक ही सिमटी रही है।

जिम्मेदारों पर उठे सवाल –
किस अधिकारी की निगरानी में यह भ्रष्टाचार चल रहा है?
क्यों नहीं होती नियमित जांच और गुणवत्ता परीक्षण?
क्या यह केवल कोटेदार की गलती है या ऊपर तक फैला “सिस्टमेटिक भ्रष्टाचार”?

ग्रामीण अब मांग कर रहे हैं कि डीएम कुशीनगर स्वयं जांच कर जिम्मेदारों पर कड़ी कार्रवाई करें, ताकि भविष्य में कोई गरीब अपने हिस्से का अनाज इस तरह की गंदगी भरा न पाए।

√ मिलावट को लेकर क्या कहते हैं कोटेदार संदीप मद्धेशिया

पत्रकारों से बात-चीत के दौरान कोटेदार ने बताया कि इसके पहले भी चावल की बोरियों में इस तरह के मिलावटी समान आ चुके हैं! जिसकी सूचना विभाग को दी गई लेकिन, इस तरह की शिकायतों पर विभाग के द्वारा कोई ठोस करवाई नहीं की जाती है।

मिड-डे मील पर पड़ेगा भारी असर!”

जिले में सरकारी राशन की बोरियों से मिले मिट्टी, सड़े चूहे, दस्ताने और सागौन के पत्ते जैसी गंदगी अब लोगों की चिंता का कारण बन चुकी है। सवाल यह उठ रहा है — अगर यही मिलावटी अनाज विद्यालयों में बच्चों को मध्याह्न भोजन (मिड-डे मील) के रूप में परोसा जाए तो क्या होगा?

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे दूषित अनाज के सेवन से बच्चों में आंतों के संक्रमण, फूड पॉइजनिंग, एलर्जी, और कुपोषण जैसी गंभीर बीमारियाँ फैल सकती हैं।
छोटे बच्चों की रोग-प्रतिरोधक क्षमता कम होती है, इसलिए यह मिलावट उनके जीवन के लिए खतरा बन सकती है।

ग्रामीणों का कहना है कि अगर ऐसी लापरवाही जारी रही, तो “मिड-डे मील” जैसी योजना पोषण के बजाय बीमारी का ज़रिया बन जाएगी।

अब सवाल प्रशासन से — क्या जिम्मेदार अधिकारी जागेंगे, या मासूम बच्चों की थाली तक यह जहर पहुंचने का इंतज़ार करेंगे?

यह घटना केवल एक पंचायत का मामला नहीं — यह उन लाखों गरीबों के साथ अन्याय का प्रतीक है, जो सरकार की योजनाओं पर भरोसा करते हैं।
क्या कुशीनगर प्रशासन दोषियों पर शिकंजा कस पाएगा या यह मामला भी फाइलों में दफन हो जाएगा?

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