कुशीनगर: अवैध “निजी अस्पतालों” में मरीजों की ज़िंदगी से हो रहा खिलवाड़।
धनंजय कुमार पाण्डेय, ब्यूरो चीफ, उत्तर प्रदेश
1. कुशीनगर जनपद में “रजिस्टर्ड निजी अस्पतालों” की सूची सार्वजनिक हो!
2. सीएमओ दफ़्तर के बाहर लगे अस्पतालों की जानकारी, तब जनता को मिलेगी सही सुविधा!
3. लगातार निजी अस्पतालों की पारदर्शिता पर उठ रहे सवाल, अब जवाबदेही भी हो तय!
4. ऐसा करने से मरीजों को मिलेगी राहत – कौन-सा अस्पताल रजिस्टर्ड, सबके सामने साफ!
5. ऐसा करने से “ग़ैर-पंजीकृत अस्पतालों” पर लगेगी लगाम, फिर सीएमओ कार्यालय से की जाए सख़्ती की शुरुआत!
5. ऐसा कर योगी सरकार के “जीरो टॉलरेंस नीति” का होगा शत प्रतिशत पालन।
न्यूज रिपोर्ट 26 अगस्त 2025
कुशीनगर ज़िले में स्वास्थ्य सेवाओं की तस्वीर चिंताजनक होती जा रही है। यहां कई निजी अस्पताल बिना रजिस्ट्रेशन के खुलेआम संचालित हो रहे हैं, जहां तथाकथित डॉक्टर मरीजों की ज़िंदगी के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि ये अस्पताल न तो स्वास्थ्य विभाग के मानकों पर खरे उतरते हैं और न ही इनके पास प्रशिक्षित चिकित्सक मौजूद हैं। कई जगहों पर कंपाउंडर और झोलाछाप डॉक्टर खुद को विशेषज्ञ बताकर इलाज कर रहे हैं, जिससे मरीजों को सही इलाज मिलने के बजाय और गंभीर परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि इन अस्पतालों में न तो आपातकालीन सुविधाएं उपलब्ध हैं और न ही जीवनरक्षक उपकरण। फिर भी यहां रोजाना दर्जनों मरीज इलाज कराने को मजबूर हैं, क्योंकि सरकारी अस्पतालों में पर्याप्त डॉक्टर और संसाधनों की कमी है।
लोगों ने आरोप लगाया कि स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही और भ्रष्टाचार के कारण ही ऐसे अस्पताल धड़ल्ले से चल रहे हैं। सवाल यह भी उठता है कि आखिर बिना रजिस्ट्रेशन और बिना जांच के ये अस्पताल कैसे संचालित हो रहे हैं और इन पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है?
मरीजों और परिजनों ने प्रशासन से मांग की है कि बिना रजिस्ट्रेशन चल रहे सभी अस्पतालों की सूची सार्वजनिक की जाए और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में किसी की जान झोलाछाप डॉक्टरों की लापरवाही से न जाए।
यह मामला अब जनहित का बन चुका है और यदि समय रहते जिला प्रशासन/मुख्य चिकित्साधिकारी कि तरफ से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो यह “अवैध रूप से संचालित हो रहे निजी अस्पताल किसी बड़े हादसे को न्योता दे सकते हैं।
ऐसे में जिला प्रशासन जनपद में “रजिस्टर्ड निजी अस्पतालों” की सूची को सार्वजनिक कर जनहित का कार्य कर सकती है।