कुशीनगर/कोटवा के अनन्या पाली क्लिनिक एंड चाइल्ड केयर अस्पताल में ईलाज के दौरान नवजात शिशु की मौत।

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धनंजय कुमार पाण्डेय, ब्यूरो चीफ, उत्तर प्रदेश

✓ कुशीनगर में योगी सरकार के “जीरो टॉलरेंस नीति” का प्रतिशत भी दिख रहा जीरो।

✓ कोटवा के “न्यू लाइफ केयर अस्पताल” में पथरी के ऑपरेशन के दौरान मरीज की किडनी निकालने का मामला अभी सुलझा ही नहीं कि, एक और वारदात को मिला अंजाम।

✓ कुशीनगर में मरीजों की जान से हो रहा खिलवाड़, जिले में चिकित्सा विभाग लापरवाह!

✓ कहीं डॉक्टर नदारद, कहीं दवाएं गायब तो कही कर्मचारियों की भाषा से परेशान मरीज, अस्पताल बन रहे परेशानी का अड्डा।

✓ कुशीनगर में स्वास्थ्य सेवाओं की बिगड़ी हालत, जनता बेहाल – जिम्मेदार मौन!

✓ जनता कर रही इलाज का इंतज़ार, तो वहीं विभाग कर रहा सिर्फ़ कागज़ी कार्रवाई!

समाचार : 17 अगस्त 2025

नेबुआ नौरंगिया थानाक्षेत्र के कोटवा कला में संचालित “न्यू लाइफ केयर अस्पताल” में पथरी के ऑपरेशन के दौरान मरीज की किडनी निकालने का मामला अभी सुलझा ही नहीं था कि,
स्थानीय क्षेत्र में ही संचालित “अनन्या पाली क्लिनिक एंड चाइल्ड केयर अस्पताल” में आज दोपहर बाद इलाज के दौरान एक नवजात शिशु की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई! शिशु की मृत्यु के बाद अस्पताल संचालक सहित सभी अस्पताल कर्मचारी अस्पताल को बंद करके मौके से फरार हो गए।

हनुमानगंज थानाक्षेत्र के बोधिछपरा गांव निवासिनी मधु पत्नी छोटे साहनी जो रक्षाबन्धन पर्व पर नेबुआ नौरंगिया थानाक्षेत्र के खानु छपरा गांव अपने मायके आयी थी, इसी दौरान उनके एक वर्षीय पुत्र प्रियांशु का स्वास्थ्य खराब होने के कारण स्थानीय क्षेत्र के कोटवा कला में संचालित अनन्या पाली क्लिनिक एंड चाइल्ड केयर अस्पताल में इलाज के लिए शुक्रवार को भर्ती करवा दिया। परिजनों का आरोप है कि डॉक्टर की लापरवाही से ही रविवार को दोपहर बाद उक्त बच्चे की मौत हो गयी। उसके मौत के बाद अस्पताल संचालक ने आनन फानन में एम्बुलेंस मंगाकर जबरन जिला अस्पताल भेज दिया। जहाँ पर डॉक्टरों ने जांचोपरांत उसे मृत घोषित कर दिया।

लगातार हुई इन दोनो गंभीर घटनाओं ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर एक बार पुनः गहरा सवाल खड़ा कर दिया है।
वही परिजनों का कहना है कि, नवजात को सामान्य इलाज के लिए भर्ती कराया गया था, लेकिन इलाज में लापरवाही बरती गई, जिससे उसकी मौत हो गई। मौत के बाद अस्पताल प्रशासन ने न सिर्फ कोई जानकारी साझा की, बल्कि अस्पताल बंद कर मौके से भाग गए। इस घटना की सूचना सरेआम होते ही बड़ी संख्या में लोग मौके पर पहुंच कर स्वास्थ्य विभाग के विरुद्ध अपना आक्रोश प्रदर्शित करने लगे।

वहीं जनता का कहना है कि जनपद में आखिर किन मानकों के आधार पर ऐसे अस्पतालों का संचालन करने की अनुमति दी जा रही है।
लगातार हो रही स्वास्थ्य लापरवाहियों और निजी अस्पतालों की मनमानी ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़े कर दिए हैं। लोगों की मांग है कि जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग तुरंत हस्तक्षेप करे और दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई हो।
खबर लिखे जाने तक परिजन शव को अस्पताल के बाहर रखकर कार्यवाही की मांग पर अड़े हुवे थे, जबकि स्थानीय थाने के पुलिसकर्मी शव का पीएम करवाने हेतु आवश्यक कार्यवाही करने में जुटी हुई थी।

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