पड़रौना नगरपालिका में 2003 से अस्तित्व में आया गरुणनगर/हेमचंद विक्रमादित्यानगर आज भी मूलभूत सुविधाओं से कोसों दूर, सिर्फ कागज़ों पर शहरी इलाका!

0
image_editor_output_image-1493796231-1753516800846.jpg
Spread the love

धनंजय कुमार पाण्डेय, ब्यूरो चीफ, उत्तर प्रदेश

1. “2003 में जोड़ा गया गरुण नगर, आज भी तरक्की से कोसों दूर!”
2. “पड़रौना नगरपालिका में 20 साल बाद भी गरुण नगर उपेक्षा का शिकार!”
3. “गरुण नगर: विकास के वादे हुए हवा, ज़मीनी हकीकत आज भी वही पुरानी!”
4. “नगरपालिका में शामिल हुआ पर न मिला हक़ – गरुण नगर अब भी मूलभूत सुविधाओं को तरस रहा!”
5. “2003 से अब तक सिर्फ वादे, गरुण नगर में नहीं पहुंचा विकास का उजाला!”

पड़रौना, कुशीनगर।
2003 में गरुणनगर को पड़रौना नगरपालिका में शामिल किया गया था, जिससे क्षेत्रवासियों को उम्मीद जगी थी कि अब उनके इलाके में भी विकास की रफ्तार तेज होगी। लेकिन दो दशक बीत जाने के बावजूद आज भी गरुणनगर मूलभूत सुविधाओं को तरस रहा है। न पक्की सड़कें हैं, न जल निकासी की समुचित व्यवस्था, न नियमित सफाई और न ही सार्वजनिक रोशनी की व्यवस्था।

हेमचन्द विक्रमादित्य नगर में विकास कार्यों को लेकर क्या कहते हैं लोग!



स्थानीय निवासियों का आरोप है कि हर चुनाव से पहले नेताओं द्वारा बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन जैसे ही चुनाव खत्म होता है, गरुणनगर फिर हाशिये पर धकेल दिया जाता है।
स्थानीय निवासी रामविलास ने बताया,
“हमने कई मास बीत गए पर नालियों की सफाई होते नहीं देखी, न कभी गली में स्ट्रीट लाइट जली। सिर्फ नगरपालिका में नाम जोड़ देने से विकास नहीं होता।” बरसात के दिनों में हालात और भी बदतर हो जाते हैं। जलभराव, कीचड़ और बदबू के कारण स्थानीय लोगों का घर से निकलना मुश्किल हो जाता है। बच्चों की पढ़ाई और बुजुर्गों की सेहत पर इसका सीधा असर पड़ रहा है।
सामाजिक कार्यकर्ता सीमा देवी ने कहा,
“गरुणनगर सिर्फ वोट बैंक बनकर रह गया है। हम नागरिक हैं, भीख नहीं मांग रहे – हमारा भी अधिकार है कि हमें बुनियादी सुविधाएं मिलें।”
नगरपालिका प्रशासन की ओर से इस मुद्दे पर कोई ठोस प्रतिक्रिया नहीं आई है। लेकिन जनता का सब्र अब टूटने की कगार पर है। अगर जल्द सुधार नहीं हुआ, तो गरुणनगर की जनता आंदोलन का रास्ता भी अपना सकती है।

“विकास नहीं तो वोट नहीं!”
गरुणनगर/हेमचंद विक्रमादित्यानगर अब चुप नहीं बैठेगा।

🔴 2003 में नगरपालिका में शामिल, पर आज भी हाल गांव जैसे!
गरुणनगर की उपेक्षा, विकास का वंचित हिस्सा!
20 साल बीत गए… गरुण नगर को अब भी इंतजार है सड़क, नाली और साफ सफाई जैसी मूलभूत सुविधाओं का।
🔴 गरुण नगर: नगरपालिका का हिस्सा, लेकिन सुविधाओं से बाहर!
🛑 कागजों पर शहरी, ज़मीनी हकीकत में उपेक्षित! गरुण नगर का हक़ कब मिलेगा?

गरुण नगर की उपेक्षा पर उठे सवाल, पड़रौना पालिका ईओ के खिलाफ भड़की जनता।

गरुण नगर की बदहाल हालत को लेकर स्थानीय लोगों का गुस्सा अब पड़रौना नगर पालिका के ईओ (कार्यपालक अधिकारी) पर फूट पड़ा है। 2003 में नगर पालिका में शामिल होने के बावजूद गरुण नगर में न तो सड़कें बनीं, न नालियां साफ हुईं और न ही कोई ठोस विकास कार्य हुआ।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि बार-बार लिखित और मौखिक शिकायतों के बावजूद ईओ द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई।
“ईओ साहब सिर्फ फाइलों में विकास दिखाते हैं, ज़मीन पर नहीं,” – यह कहना है क्षेत्र के निवासी सुनील गुप्ता का।

जनप्रतिनिधियों और वार्ड सभासदों ने भी पालिका प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए हैं।
सभासद रेखा देवी ने बताया:
“हर साल बजट पास होता है, योजनाएं बनती हैं, लेकिन गरुण नगर को हमेशा नजरअंदाज किया जाता है। ईओ से कई बार बात की गई, लेकिन नतीजा शून्य रहा।”

लोगों का आरोप है कि ईओ की लापरवाही और पक्षपातपूर्ण रवैये के चलते गरुण नगर में मूलभूत सुविधाएं तक नहीं पहुंच पाईं हैं। यहां तक कि बारिश में जलभराव, कीचड़ और गंदगी की समस्या विकराल हो जाती है, लेकिन नगर पालिका की ओर से कोई सफाई या राहत कार्य नहीं कराया जाता।

सामाजिक संगठनों ने चेतावनी दी है कि अगर ईओ पर शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई और गरुण नगर के विकास के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो नगर पालिका कार्यालय के घेराव और धरना-प्रदर्शन की योजना बनाई जाएगी।

मुख्य आरोप:

ईओ की कार्यप्रणाली में लापरवाही!
जनशिकायतों की अनदेखी!
क्षेत्रीय भेदभाव!
विकास योजनाओं की धरातल पर अनुपस्थिति!

✓ अब सवाल उठता है:
क्या गरुण नगर के लोग इसी तरह उपेक्षित रहेंगे? क्या नगर पालिका में बैठे अधिकारी जवाबदेह नहीं होंगे?

जवाब जनता मांग रही है – ज़ोर से, खुलकर, और अब चुप नहीं रहेगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed